क्योंकि ग़ुनाह की मज़दूरी मौत है, लेकिन ख़ुदा का इनाम हमारे ख़ुदावंद यीशु मसीह में अब्दी ज़िंदगी है।
एक दिन मैं एक लेख पढ़ रही थी और उसमे लिखा था:
अगर एक हवाई जहाज़ एक घंटे तक अपने रास्ते से सिर्फ़ एक डिग्री भी भटक जाए, तो हर ६० नॉटिकल मील सफ़र के बाद वह अपनी मंज़िल से लगभग १ नॉटिकल मील दूर हो सकता है। लगभग ५०० से ६०० मील प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ने वाले एक आम कमर्शियल विमान के लिए इसका मतलब है कि सिर्फ़ एक घंटे के बाद वह अपने सही रास्ते से लगभग ८ से १० मील दूर हो सकता है।
जो शुरुआत में एक छोटी सी भटकन लगती है, उसके नतीजे बहुत बड़े हो सकते हैं!
जब मैं अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचती हूँ, तो मुझे याद आता है कि नाफ़रमानी अक्सर अचानक या बहुत बड़ी बात से शुरू नहीं होती। यह अक्सर छोटे-छोटे समझौते, जवाब देने में देरी, या आधी अधूरी फ़रमाँबरदारी से शुरू होती है। लेकिन वक़्त के साथ ये छोटी-छोटी भटकनें बड़े नतीजों की ओर ले जा सकती हैं।
लेकिन नाफ़रमानी सिर्फ़ हमारे नतीजों पर असर नहीं करती, यह हमारे दिल पर भी असर करती है।
जब हम बार-बार अपनी मर्ज़ी को चुनते हैं, तो आहिस्ता-आहिस्ता ख़ुदा की आवाज़ के लिए हमारी संवेदनशीलता कम होने लगती है। जो कभी बिल्कुल साफ़ महसूस होता था, वह धुंधला सा होने लगता है। जो कभी हमारे ज़मीर को बेचैन करता था, वह हौले-हौले हमें आम बात लगने लगती है। यही रूहानी भटकाव का सबसे ख़तरनाक पहलू है।
ख़ुदा के हुक्म मनमाने नहीं होते, बल्कि वे हमारी हिफ़ाज़त करने वाले, हमारे रिश्ते को मज़बूत करने वाले और एक मक़सद रखने वाले होते हैं। जब ख़ुदा हमें फ़रमाँबरदारी के लिए बुलाता है, तो वह हमें ज़िंदगी, सुक़ून और अपने साथ सही तालमेल की ओर ले जा रहा होता है।
इसके विपरीत, नाफ़रमानी अक्सर पछतावे, उलझन और ख़ुदा से दूर ले जाती है।
*क्योंकि ग़ुनाह की मज़दूरी मौत है, लेकिन ख़ुदा का इनाम हमारे ख़ुदावंद यीशु मसीह में अब्दी ज़िंदगी है।- रोमियों ६:२३
ग़ुनाह के नतीजे होते हैं, लेकिन ख़ुदा का फ़ज़्ल पुनर्स्थापित करने का रास्ता भी देता है। जब हम नाकाम होते हैं, तब भी वापस लौटने की उसकी दावत खुली रहती है। उसका अनुशासन हमें मुजरिम ठहराने के लिए नहीं, बल्कि हमें फ़िर से अपने साथ सही तालमेल में लाने के लिए होता है।
फ़रमाँबरदारी सिर्फ़ इस बारे में नहीं है कि हम बुरे नतीजों से बचें। यह उस बेहतर रास्ते को अपनाने के बारे में है जो ख़ुदा हमारे लिए चाहता है। ख़ुदा का रास्ता हमें सीमित करने वाला नहीं, बल्कि ज़िंदगी देने वाला रास्ता है। नाफ़रमानी की क़ीमत हक़ीक़ी है, लेकिन उसके साथ साथ ख़ुदा के क़रीब चलने का इनाम भी हक़ीक़ी है।
आपसे मेरी गुज़ारिश है कि अपने छोटे-छोटे फ़ैसलों को भी गंभीरता से लें। वे निजी लम्हे, वे अनदेखे फ़ैसले जिन्हें शायद कोई और नहीं देखता, लेकिन जो आपकी ज़िंदगी की दिशा तय करते हैं। उन छोटी-छोटी बातों में आपकी वफ़ादारी आपकी सोच से कहीं ज़्यादा मायने रखती है।