अपने पूरे दिल से ख़ुदा पर भरोसा रख और अपनी समझ पर इत्मिनान न कर।
क्या कभी आपको ऐसा महसूस हुआ है, कि ख़ुदा आपसे कुछ करने के लिए कह रहा हैं, लेकिन आप उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं और फ़िर हालात और भी मुश्किल हो जाते है?
मेरे साथ भी ऐसा कई बार हुआ है और इसने मुझे सिखाया है कि जब ख़ुदा हमे कुछ करने के लिए कहता हैं, तो मुझे तुरंत क़दम उठाना चाहिए। और यह अपनी ही भलाई के लिए है। 😅 मैं यह सीख रही हूँ कि फ़रमाँबरदारी सबसे असरदार तब होती है, जब वह तुरंत मानी जाती हैं।
जब ख़ुदा कुछ करने के लिए कहता हैं और मैं बे-झिझक जवाब देती हूँ, तो मुझे ऐसी स्पष्टता और सुक़ून का अनुभव होता है, जिसका वर्णन करना मुश्किल सा है। जो बात मुझे पहले से मालूम है कि ख़ुदा मुझसे कुछ करने के लिए कह रहा हैं, उसे ज़्यादा सोचने या नजरअंदाज़ करने के बजाय तुरंत कर देना एक अलग ही तरह की आज़ादी देता है।
तुरंत फ़रमाँबरदारी के लिए भरोसे की ज़रूरत होती है। इसका मतलब है कि हम यह ईमान रखें कि ख़ुदा की हिदायत भलाई के लिए है, भले ही हमें अभी पूरी तरह समझ न आए कि आगे क्या होने वाला है। यह हमारे हर चीज़ को अपने काबू में रखने की मर्ज़ी को चुनौती देती है और हमें ख़ुदा पर निर्भर रहना सिखाती है।
देर से की गई फ़रमाँबरदारी अक्सर हमारे अंदर बेचैनी पैदा करती है। जितनी देर हम इंतज़ार करते हैं, उतना ही ज़्यादा हम अपने अंदर संघर्ष करते रहते हैं। शक़ बढ़ सकता है और स्पष्टता कम हो सकती है। लेकिन जब हम जल्दी जवाब देते हैं, तो हम बार-बार सोचने और अपने फ़ैसले पर शक़ करने की गुंजाइश कम कर देते हैं और ख़ुदा की रहनुमाई के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलना शुरू करते हैं।
*“अपने पूरे दिल से ख़ुदा पर भरोसा रख और अपनी समझ पर इत्मिनान न कर। अपने सभी मार्गों में उसे मानकर चल और वह तुम्हारी राहों को सीधा करेगा।” - नीतिवचन ३:५-६ HINOVBSI
फ़रमाँबरदारी समझने पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित होती है। हमें क़दम उठाने से पहले हर बात को समझना ज़रूरी नहीं है। हमें बस उस पर भरोसा करना है जो सब कुछ जानता है।
मैंने अपनी ज़िंदगी में देखा है कि जब मैंने तुरंत फ़रमाँबरदारी दिखाई, तो अक्सर मुझे अनपेक्षित सुक़ून मिला, नए दरवाज़े खुले या मेरे अंदर गहरी रूहानी बढ़ोतरी हुई। भले ही नतीजा तुरंत दिखाई न दे, फ़िर भी मेरे दिल में यह यक़ीन बना रहता है कि मैं ख़ुदा की रहनुमाई के अनुसार चल रही हूँ।
आज मैं आपको प्रोत्साहित करना चाहती हूँ कि जब आपको महसूस हो कि ख़ुदा आपके दिल में किसी बात की तरफ़ इशारा कर रहा हैं, तो जल्दी जवाब दें। चाहे वह किसी की हौसला-अफ़ज़ाई करना हो, किसी को माफ़ करना हो, कुछ देना हो, किसी की सेवा करना हो, या बस ठहरकर ख़ुदा की आवाज़ सुनना हो।