आज, अगर आप ख़ुदा की आवाज़ सुने, तो अपने दिलों को सख़्त न करें…।
ज़िंदगी शायद ही कभी हमारे सामने ऐसे बड़े और एक ही बार होने वाले फ़ैसले रखती है, जो सब कुछ तय कर दें।
इसके बजाय, हम हर दिन छोटे दोराहों से गुज़रते हैं, जहाँ हमें फ़रमाँबरदारी और आज़ादी, भरोसा और क़ाबू करने, ख़ुद को सौंप देने और अपनी राह ख़ुद चुनने के बीच फ़ैसला करना होता है।
हर सुबह जब हम जागते हैं, तो एक ऐसे दिन में क़दम रखते हैं जहाँ ख़ुदा पहले से ही हमसे बात कर रहा होता है। सवाल यह है कि क्या हम सुन रहे हैं! फ़रमाँबरदारी सिर्फ़ किसी काम को करना नहीं है, बल्कि यह हमारे दिल की हालत के बारे में है। यह इस बात के बारे में है कि हम अपनी समझ के मुताबिक़ योजनाएँ बनाने से पहले अपने दिल को ख़ुदा की आवाज़ के साथ मिला लें।
बाइबल हमें तुरंत जवाब देने की अहमियत याद दिलाती है:
*“आज, अगर आप ख़ुदा की आवाज़ सुने, तो अपने दिलों को सख़्त न करें…।” - इब्रानियों ३:१५
“आज” यह एक लफ्ज़ हमारी उस आदत को चुनौती देता है जिसमें हम किसी बात को नज़रअंदाज़ करते हैं, अपने लिए वजहें बनाते हैं, या किसी ज़्यादा सुविधाजनक वक़्त का इंतज़ार करते हैं। लेकिन फ़रमाँबरदारी में देर करना अक्सर फ़रमाँबरदारी से इनकार करने जैसा बन जाता है। जब हम उस बात को नज़रअंदाज़ करते हैं जिसके लिए ख़ुदा हमें प्रेरित कर रहा है, तो धीरे धीरे हम उस पर भरोसा करने के बजाय ख़ुद पर भरोसा करने लगते हैं।
मैंने महसूस किया है कि जब मैं छोटी-छोटी बातों में भी नाफ़रमानी में ज़्यादा देर तक ठहरती हूँ, तो उसे सही ठहराना मेरे लिए आसान होता जाता है। वक़्त के साथ मेरा दिल उतना जवाब देने वाला नहीं रहता। ऐसा इसलिए नहीं कि ख़ुदा ने बोलना बंद कर दिया है, बल्कि इसलिए कि मैंने सुनना बंद कर दिया है।
इसीलिए हर दिन अपने आप को ख़ुदा के हवाले करना बहुत ज़रूरी है। यह हमारे दिल को नरम और जवाब देने के लिए तैयार करता है।
फ़रमाँबरदारी कोई बोझ नहीं है, यह एक रिश्ते का जवाब है। ख़ुदा हमसे इसलिए फ़रमाँबरदारी निभाने को नहीं कहता कि हम उसकी मोहब्बत हासिल कर सकें। वह हमें इसलिए फ़रमाँबरदारी निभाने के लिए बुलाता है क्योंकि उसकी मोहब्बत हमें पहले से मिली हुई है।
हमारी फ़रमाँबरदारी हमारे भरोसे का इज़हार बन जाती है। यह उस अनदेखे रिश्ते की नज़र आने वाली तस्वीर बन जाती है, जो हमारा ख़ुदा के साथ है।
आज ज़रा ठहरकर सुनने और जवाब देने का फ़ैसला करें। डर से नहीं, बल्कि मोहब्बत की वजह से।
आओ, ,मिलकर दुआ करें:
ऐ आसमानी ख़ुदा, मेरी मदद कर कि मैं आज तेरी आवाज़ को पहचान सकूँ और बिना देर किए उसका जवाब दे सकूँ। मेरे दिल को नरम, मेरी रूह को तैयार और मेरे ज़हन को तेरी रहनुमाई के लिए चौकन्ना रख। मुझे सिखा कि मैं फ़रमाँबरदारी में चलूँ, मजबूरी की वजह से नहीं, बल्कि तेरे लिए मोहब्बत और इस भरोसे के साथ कि तू कौन हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।