अगर कोई मसीह में है, तो वह नई सृष्टि है। पुरानी बातें बीत गई हैं, देखो, सब बातें नई हो गई हैं!
कुम्हार और उसकी मिट्टी से सीखने वाले प्रोस्ताहन के छठे दिन में आपका स्वागत है।
मैं कल ख़ुदा के कलाम से मिली उस सच्चाई को लेकर ज़्यादा ख़ुश हूँ। ख़ुदा टूटे हुए बर्तनों को फेंकता नहीं है, बल्कि उन्हें फ़िर से बनाता है!
इस सच्चाई ने मेरी ज़िंदगी बदल दी है, क्योंकि मुझे सिर्फ़ एक और मौक़े की ज़रूरत नहीं पड़ी है। मुझे बार-बार रहमत और फ़ज़्ल की ज़रूरत पड़ी है।
और ख़ुदा की रहमत कभी ख़त्म नहीं हुई। यह आयत मेरी अपनी ज़िंदगी में एक जंग का नारा बन गई है:
*“इसलिए, अगर कोई मसीह में है, तो वह नई सृष्टि है। पुरानी बातें बीत गई हैं, देखो, सब कुछ नया हो गया है!” - २ कुरिन्थियों ५:१७
जापान की कला “किंत्सुगी” ख़ुदा के काम की एक ख़ूबसूरत तस्वीर पेश करती है। टूटे हुए मिट्टी के बर्तनों को फेंकने के बजाय, जापानी कारीगर उसे फ़िर से जोड़ते हैं और टूटे हुए हिस्सों की दरारों को सोने से भर देते हैं। इससे वह टूटा हुआ बर्तन और भी ज़्यादा क़ीमती बन जाता है!
ख़ुदा भी हमारे साथ ऐसा ही करता है! जब कोई चीज़ बिगड़ जाती है, तो कुम्हार हार नहीं मानता। वह उसे फ़िर से आकार देता है और मज़बूत करता है, ताकि उसका एक और बेहतर मक़सद पूरा हो सके। जब वह बर्तन मरम्मत के लायक भी नहीं लगता, तब भी ख़ुदा उसके लिए एक बिल्कुल नया मौक़ा तैयार कर रहा होता है।
सच तो यह है कि कभी कभी किसी चीज़ को तोड़कर फ़िर से बनाने की ज़रूरत पड़ती है। कभी कभी मिट्टी को ख़ुदा की तरबियत और पाक करने वाली ताक़त में “भिगोए” जाने की ज़रूरत होती है, ताकि उसे एक बार फ़िर चाक पर रखा जा सके।
और यह जवाब आसान नहीं होता!
ख़ुदा शायद:
गुरूर को निकालना चाहे।कड़वाहट को तोड़ना चाहे।ख़्वाहिशों को फ़िर से आकार देना चाहे।एक सख़्त दिल को नरम करना चाहे।सब कुछ फ़िर से शुरू करना चाहे।
लेकिन यह हमेशा किसी बेहतर चीज़ के लिए होता है। वह हमें कमतर नहीं बना रहा है, बल्कि हमें नया बना रहा है।
और हमें सिर्फ़ इस प्रक्रिया पर भरोसा करना है, तब भी जब यह मुश्किल हो। तब भी जब इसमें कुछ छोड़ना पड़े। क्योंकि हम जानते हैं कि इसका नतीजा हर तकलीफ़ के लायक है।
याद रखे, जब ख़ुदा आपको फ़िर से आकार दे रहा हो, तो उस प्रक्रिया पर भरोसा करें। जो कुछ वह आपमें कर रहा है, वह आपकी भलाई और उसके बेहतर मक़सद के लिए है।