जिसका दिल तुझ पर है, उसे तू सलामत रखेगा, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है।
इस सप्ताह हम इस बात पर ग़ौर कर रहे हैं कि कुम्हार के घर जाना और वहाँ जो हम देखते और अनुभव करते हैं, उससे सीखना हमारे लिए क्या मायने रखता है, जैसा कि ख़ुदा ने यिर्मयाह नबी को यिर्मयाह अध्याय १८ में करने के लिए कहा था।
तो उस तस्वीर को अपने मन में रखे: मिट्टी, घूमता हुआ चाक, मिट्टी को आकार देते हुए हाथ, पानी और आग।
मिट्टी के बर्तन बनाने में सबसे अहम बातों में से एक है मिट्टी को बीच में स्थिर रखना।
अगर मिट्टी चाक के बीच में सही तरीक़े से स्थिर न हो, तो वह डगमगाने लगती है। वह गिर जाती है। दबाव पड़ने पर वह बिखर जाती है।
मैं नहीं जानती कि आपका अनुभव कैसा रहा है, लेकिन मैंने यह जाना है कि ज़िंदगी के बारे में भी यही बात सच है।
जब मेरी ज़िंदगी का मरकज़ ख़ुदा नहीं होता, तो सब कुछ अस्थिर महसूस होता है। मेरे जज़्बात ऊपर नीचे होते रहते हैं। मेरी प्राथमिकताएँ अपनी दिशा खो देती हैं। मेरा ईमान डगमगाने लगता है। मेरा सुक़ून खो जाता है।
लेकिन जब मैं ख़ुदा को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाती हूँ और अपनी ज़िंदगी को उसकी सच्चाई के साथ मिलाती हूँ, तब स्थिरता आती है। सुक़ून मिलता है। स्पष्टता आती है।
बाइबल कहती है:
*“जिसका दिल तुझ पर है, उसे तू सलामत रखेगा, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है।” - यशायाह २६:३
और:
*“अपने पुरे मन से ख़ुदा पर भरोसा रखना और ख़ुद की समझ का सहारा न लेना। अपने सभी चालचलन में उसे याद करना और वह तेरे लिए सीधा रास्ता निकालेगा।” - नीतिवचन ३:५-६ HINOVBSI
अपनी ज़िंदगी को केन्द्रित करना कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे हम अपने बल पर हासिल कर सकते हैं। यह वह काम है जो ख़ुदा हमारे अंदर करता है, जब हम ख़ुद को उसके हवाले कर देते हैं।
केन्द्रित होने का अर्थ है कि आप चुनते हैं:ख़ुद की राय के ऊपर उसकी सच्चाई।ख़ुद की पसंद के ऊपर उसके तरीके।हर दूसरी आवाज़ के ऊपर उसकी आवाज़।
जब आप यह चुनाव करते हैं, तो आपको फ़र्क़ दिखाई देगा।
जब मैं ध्यान केन्द्रित करती हूँ, तो मैं ज़्यादा ख़ामोश रहती हूँ। अधिक सब्र करने वाली हो जाती हूँ। यहाँ तक कि ऐसे दौर के बीच में भी ख़ुश रहती हूँ।
लेकिन जब मैं ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाती, तो मेरी ज़िंदगी बिखर जाती है और ऐसा महसूस होता है जैसे कोई बात बे-क़ाबू हो रही हो।
आज यह फ़ैसला करें कि आप ख़ुद को ख़ुदा की हथेलियों में बनाए रखें और केन्द्रित रहें, क्योंकि उसके हाथों में ज़िंदगी स्थिर रहती है और सब कुछ अपनी जगह पर बना रहता है।
आओ, मिलकर दुआ करें:
ऐ आसमानी पिता, मेरी ज़िंदगी में तुझे मरकज़ बनाने में मेरी मदद कर। मेरे दिल को तेरी सच्चाई के साथ मिला दे और जब मैं मेरे संतुलन से हटने लगूँ, तब मुझे स्थिर कर। मेरी ख़ुद की समझ से बढ़कर तुझ पर भरोसा करना मुझे सिखा। आज मुझे तेरी मौजुदगी में स्थिर कर। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।