उठ और कुम्हार के घर जा और मैं वहाँ अपनी बातें तुझे सुनाऊँगा।
कभी कभी ऐसे पल आते हैं जब मुझे महसूस होता है कि ख़ुदा मुझे अपने साथ और गहराई में चलने के लिए बुला रहा है, लेकिन हर बार मैं उस बुलाहट को स्वीकार नहीं कर पाती।
कभी मैं इनकार करती हूँ। कभी देर करती हूँ। कभी ख़ुद को शोर, पर्दे और थकान में उलझा लेती हूँ। लेकिन मैं एक बात सीख रही हूँ: जब भी मैं ख़ुदा की बुलाहट को ना कहती हूँ, तो मैं उस चीज़ से महरूम रह जाती हूँ जो वह मुझे दिखाना चाहता है।
यिर्मयाह १८ में ख़ुदा ने यिर्मयाह को सिर्फ़ एक संदेश नहीं दिया, बल्कि उसे एक दावत दी: *“कुम्हार के घर जा।” और यिर्मयाह की प्रतिक्रिया बहुत सरल थी। वह चला गया।
यह बात मुझे चुनौती देती है, क्योंकि फ़रमाँबरदारी और ख़ुदा से मिलने वाली नई समझ हमेशा एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। अगर मैं ख़ुदा की आवाज़ सुनना चाहती हूँ, तो मुझे उसके बोलने पर आगे बढ़ने के लिए तैयार रहना होगा। बाइबल की इस आयत को पढ़े:
*“यह बात जो ख़ुदा की तरफ़ से यिर्मयाह के पास आई, वह यह थी: ‘उठ और कुम्हार के घर जा और वहाँ मैं तुझे अपनी बातें सुनाऊँगा।’ तब मैं कुम्हार के घर गया और देखा कि वह चाक पर अपना काम कर रहा था।” - यिर्मयाह १८:१-३ HINOVBSI
ख़ुदा आज भी आपको उसी तरह बुला रहा है। किसी शारीरिक घर में जाने के लिए नहीं, बल्कि उसकी हुज़ूरी में आने के लिए, उससे गुफ़्तगू करने के लिए और आपकी ज़िंदगी में तब्दीली को लाने के लिए।
मुझे ख़ुद से यह सवाल पूछना पड़ता है: इस वक़्त मैं ख़ुदा की किस बुलाहट का इनकार कर रही हूँ? मैं उसका न्योता क्यों ठुकरा देती हूँ? अगर मैं उसकी इस मोहब्बत भरी दावत को “हाँ” कह दूँ, तो क्या हो सकता है?
मैं यह सच जानती हूँ कि जब मैं “हाँ” कहती हूँ, तो कभी ख़ाली हाथ वापस नहीं आती। मैं मुक़म्मल हो जाती हूँ। मुझे सुक़ून मिलता है। मैं बदल जाती हूँ।
ख़ुदा को “हाँ” कहना इस बारे में नहीं है कि मेरे पास हर सवाल का जवाब हो। यह उस पर भरोसा करने के बारे में है जिसके पास हर सवाल का जवाब है। और आज मैं ऐसी बनना चाहती हूँ जो यिर्मयाह की तरह जवाब दे।
आपका क्या ख़याल है?
मेरे पास एक ख़याल है। आओ, साथ चलते हैं!
क्यों न हम इसी मक़सद के लिए दुआ करें:
ऐ आसमानी पिता, जब तू मुझे बुलाएँ तो मुझे “हाँ” कहने की हिम्मत दें। मेरी मदद कर कि मैं अपनी ज़िंदगी की हर उलझन से ऊपर तेरी आवाज़ को पहचान सकूँ। मैं वह सब खोना नहीं चाहती जो तूने मेरे लिए रखा है। मुझे तेरी हुज़ूरी की तरफ़ ले चल और मेरे दिल को इस तरह आकार दे कि मैं फ़रमाँबरदारी के साथ जवाब दूँ। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।