जिन्हें ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें वफ़ादार साबित होना चाहिए।
साल २०२० में, जब हमारा बेटा ज़ैक अचानक हुए और बेहद गंभीर दिमाग़ी संक्रमण की वजह से ६४ दिनों तक ICU में था, तब मुझे और कॅमरॉन को दुनिया भर से बहुत से लोगों ने अस्पताल के खर्चों को पूरा करने के लिए दान भेजे। यह हमारे लिए ख़ुदा की तरफ़ से एक बहुत बड़ी बरकत थी। और जिस बात ने हमारे दिलों को सबसे ज़्यादा छुआ, वह यह थी कि उनमें से बहुत से दान गुमनाम थे। 🥹
इस बात में कुछ पाक़ज़गी है कि उन जगहों पर भी वफ़ादार बने रहना, जहाँ कोई आपको देख नहीं रहा होता। जब पहचान, सराहना या लोगों की नज़रें आप पर लगी हों, तब सेवा करना आसान लगता है। लेकिन असली किरदार उन छुपी हुई जगहों में सामने आता है, जहाँ हमारी फ़रमाँबरदारी का एकमात्र गवाह ख़ुदा होता है।
हम यह सीख रहे हैं कि ख़ुदा सबसे ज़्यादा सुर्खियों में आने वाले पलों को नहीं ढूँढता। वह ऐसे दिलों को ढूँढता है जो लगातार वफ़ादार बने रहते हैं। ऐसा ईमान जो तब भी कायम रहता है जब कोई उसे देख या पहचान नहीं रहा होता। ऐसी फ़रमाँबरदारी जो बिना किसी तालियों और वाहवाही के भी जारी रहती है।
यीशु मसीह के कम जाने पहचाने जानेवाले चेलें, जिनका ज़िक्र बाइबल में बस थोड़े से लफ़्ज़ों में मिलता है, हमें याद दिलाते हैं कि हर असर डालने वाली ज़िंदगी का हर हिस्सा दर्ज नहीं किया जाता। कुछ ज़िंदगियाँ सिर्फ़ उनकी मौजूदगी, उनकी स्थिरता और उनकी ख़ामोश इबादत की वजह से याद रखी जाती हैं।
बाइबल हमें उनकी गुमनामी के बारे में इन अल्फ़ाज़ के ज़रिए याद दिलाती है: *“अब यह ज़रूरी है कि जिनको अमानत सौंपी गई है, वे वफ़ादार पाए जाएँ।” - १ कुरिन्थियों ४:२
यह आयत हमें क़ामयाबी को एक नए नज़रिए से देखने की चुनौती देती है। ख़ुदा की नज़र में सबसे बड़ी कसौटी वफ़ादारी है। न दिखावा, न शोहरत, न पहचान, बल्कि वफ़ादारी।
इसका मतलब है तब भी मौजूद रहना जब ऐसा करना मुश्किल या असुविधाजनक हो। तब भी सेवा करना जब कोई हमे देख नहीं रहा हो। तब भी दुआ करना जब किसी और को इसका पता न हो। और तब भी ख़ुदा पर भरोसा करते रहना जब उसके नतीजे तुरंत दिखाई न दें। ख़ुदा वह देखता है जो दूसरों को दिखाई नहीं देता। और वह उन चीज़ों की भी कद्र करता है जिन्हें दूसरे शायद नज़रअंदाज़ कर दें।
आओ, मिलकर दुआ करें:
ऐ मेरे आसमानी पिता, मेरी मदद कर कि मैं ख़ुद की ज़िंदगी की उन अनदेखी और छुपी हुई जगहों में भी वफ़ादार बनी रहूँ। मेरे दिल को मज़बूत कर कि मैं बिना किसी पहचान या सराहना की ज़रूरत के तेरी सेवकाई करती रहूँ। मुझे यह सिखा कि मैं तालियों से ज़्यादा लगातार वफ़ादारी को और पहचान से ज़्यादा फ़रमाँबरदारी को अहमियत दूँ। मेरी ज़िंदगी तेरी तरफ़ मेरी एक ऐसी स्थिर और सच्ची मोहब्बत को ज़ाहिर करें, जो इस बात से प्रभावित न हो कि मुझे कौन देख रहा है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।