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Publication date 5 अक्टू. 2026

ऐ ख़ुदा, तूने मुझे जाँचा है और तू मुझे पूरी तरह जानता है।

Publication date 5 अक्टू. 2026

क्या आप कभी भीड़ में भी अनदेखा महसूस करते हैं?

लोगों से घिरे होने के बावजूद, चाहे वह कोई सार्वजनिक जगह हो, मशगुल सड़क हो या कोई बड़ा जमावड़ा, फ़िर भी कभी-कभी ऐसा महसूस हो सकता है कि कोई आपको देख ही नहीं रहा, आपकी मौजूदगी पर ध्यान नहीं दे रहा, या जैसे आप बिल्कुल अनदेखे किए गए हैं।

ऐसे पल हमारी ज़िंदगी पर एक गहरा असर डाल सकते हैं। सिर्फ़ मायूसी नहीं, बल्कि यह चाहत कि कोई हमें पहचाने, हमारी क़द्र करे, हमें देखे और यह महसूस कराए कि हमारी अहमियत है।

आज हम एक आसान लेकिन बहुत गहरी सच्चाई पर ग़ौर करेंगे: जब हमे लगता है कि कोई हमे नहीं देख रहा, तब भी ख़ुदा हमे पूरी तरह देख रहा होता है।

सुसमाचार हमें यह याद दिलाता है कि हमारी क़ीमत कभी इस बात पर निर्भर नहीं रही कि लोग हमें कितना पहचानते हैं। ख़ुदा वह सब देखता है जिसे दूसरे लोग नहीं देख पाते। वह आपकी ख़ामोश फ़रमाँबरदारी के हर क़दम को देखता है, ईमान से किए गए उन कामों को देखता है जिनके बारे में कोई नहीं जानता और भरोसे के उन अनदेखे पलों को भी देखता है। यही सच्चाई हमारी पहचान को मज़बूत आधार देती है। भजन संहिता १३९:१-२ HINOVBSI में लिखा है:

*“ऐ ख़ुदा, तूने मुझे जाँचा और तू मुझे जानता है। तू मेरा बैठना और मेरा उठना जानता है; तू मेरे ख़याल को दूर ही से समझ लेता है।” 

यह आयत हमें याद दिलाती है कि ख़ुदा की हमारे बारे में जानकारी बहुत व्यक्तिगत और लगातार रहने वाली है। ख़ुदा की मौजूदगी में हम नज़रअंदाज़ नहीं किए जाते। वह हमें पूरी तरह जानता है। आप भी ख़ुदा की नज़र में पूरी तरह जाने-पहचाने हैं, अनजान नहीं।

आपका हर क़दम, हर झिझक, हर वह ख़ामोश दुआ जो आप धीरे से करते हैं, ख़ुदा उन सब पर ग़ौर करता है।

दूसरों की नज़र में जो चीज़ नज़रअंदाज़ सी महसूस होती है, वह हक़ीक़त में ख़ुदा पर और गहराई से निर्भर होने की एक दावत हो सकती है। जब हम लोगों का ध्यान पाने की कोशिश नहीं करते, तब हम ख़ुदा की मोहब्बत में आराम करना सीखते हैं। जब हम दूसरों की पहचान और तारीफ़ के पीछे नहीं भागते, तब हम फ़रमाँबरदारी पर ज़्यादा ग़ौर कर सकते हैं।

आज मैं आपको ख़ुद का नज़रीया बदलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती हूँ। इसके बजाय कि आप पूछें, “क्या दूसरे लोग मुझे देखते हैं?” यह पूछे, “क्या मैं इस तरह जी रही हूँ जिससे उस ख़ुदा की इज़्ज़त हो, जिसकी नज़र मुझ पर हमेशा बनी रहती है?”

आओ, मिलकर दुआ करें:

ऐ आसमानी पिता, शुक्र है कि मैं तेरी नज़र में पूरी तरह जानी और पहचानी गई हूँ। मेरी मदद कर कि मैं इंसानों की मंज़ूरी पाने की ज़रूरत को छोड़ दूँ और तेरी लगातार मौजूदगी में सुक़ून पाऊँ। मुझे सिखा कि मैं ख़ामोश भरोसे के साथ चलूँ और यह यक़ीन रखूँ कि मेरी ज़िंदगी तेरे लिए बहुत मायने रखती है, यहाँ तक कि उन लम्हों में भी जिन्हें कोई और नहीं देखता। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.