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Publication date 26 सित. 2026

हम सब के बे-नक़ाब चेहरों से ख़ुदावंद का जलाल ज़ाहिर होता है।

Publication date 26 सित. 2026

आज हम १ राजा अध्याय १९ में नबी एलिय्याह के साथ अपने सफ़र को आगे बढ़ाते हैं। आयत ८ में हम पढ़ते हैं कि एलिय्याह चालीस दिन और चालीस रात तक चलते हुए होरेब, अर्थात् ख़ुदा के पर्वत, तक पहुँचा।

ज़रा सोचकर देखें, चारों ओर वीरानी ही वीरानी, दिल अब भी मायूस और रेगिस्तान में बिल्कुल तन्हा चलता हुआ एलिय्याह। अगर एलिय्याह की कहानी हमें कुछ सिखाती है, तो वह यह है कि ख़ुदा "तुरंत हल" देने को प्राथमिकता नहीं देता। अगर वह चाहता, तो उसी जगह पर एलिय्याह पर ख़ुद को प्रकट कर सकता था। लेकिन ख़ुदा ने ऐसा नहीं किया। उसने एलिय्याह को उस लंबे और थका देने वाले सफ़र से गुज़रने दिया और जब वह अपनी मंज़िल पर पहुँच गया, तब भी उसे पूरी रात इंतज़ार करने दिया (१ राजा १९:९)।

अक्सर ऐसा होता है कि ख़ुदा तुरंत मिलने वाली तसल्ली से कहीं ज़्यादा, लंबे वक़्त तक चलने वाले परिवर्तन को चुनता हैं।

और यही बात बहुत से मसीहियों के लिए एक संघर्ष बन जाती है। ख़ासकर पवित्र आत्मा की सामर्थ पर ज़ोर देने वाली कलीसियाओं में, (जिनका मैं ख़ुद भी एक हिस्सा हूँ) अक्सर इस बात पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है कि ख़ुदा अभी हमारे लिए क्या कर सकता है और क्या करना चाहिए।

अक्सर मैं ऐसे संदेश सुनती हूँ, "ख़ुदा आपको शिफ़ा देना चाहता है। ख़ुदा आपकी ज़रूरतें पूरी करना चाहता है। आपको बस ईमान रखना है!"

लेकिन ऐसी सोच में दो अहम बातें छूट जाती हैं।

  • पहली, ध्यान इस बात पर रहता है कि ख़ुदा क्या कर सकता है, न कि इस पर कि वह आपको कैसा इंसान बनाना चाहता है।
  • दूसरी, इससे यह एहसास होता है कि अगर ख़ुदा हमारी दुआ का जवाब हमारी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं देता, तो शायद हमारे ईमान में ही कमी है।

बे-शक़, वह ख़ुदा है और उसके लिए कुछ भी नामुमक़िन नहीं हैं। अगर वह चाहे, तो एक पल में हालात, यहाँ तक कि इंसान की सोच भी बदल सकता है। और हाँ, कई बार वह ऐसा करता भी है।

लेकिन, जितना वह आपको शिफ़ा देना और आपकी मदद करना चाहता है, उससे भी बढ़कर वह आपको बदलना चाहता है। (२ कुरिन्थियों ३:१८)

हमारी ज़िंदगी का यह बदलाव मसीही ईमान का एक ज़रूरी हिस्सा है। यह एक सफ़र है, एक ऐसी प्रक्रिया जो वक़्त के साथ आगे बढ़ती जाती है। सच तो यह है कि यह पूरी ज़िंदगी चलती रहती है और अक्सर हमारी बढ़ोतरी के लिए हमें मुश्किल और असहज रास्तों से होकर गुज़रना पड़ता है।

आज यह फ़ैसला करना है कि आपका ध्यान सिर्फ़ इस बात पर नहीं रहे कि ख़ुदा आपके लिए क्या कर सकता है, बल्कि इस पर रहे कि वह आपको कैसा इंसान बनाना चाहता है।

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.