अगर आप उदास, थके हुए या हारे हुए महसूस करते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपका ईमान कमज़ोर है।
किसी बड़ी जीत के बाद आपको कैसा महसूस होता हैं? बेहद ख़ुशी, जोश, या शायद थोड़ी थकान भी? जैसे आप अपनी मंज़िल की चोटी पर पहुँच चुके हों और अब आगे का रास्ता सिर्फ़ नीचे की ओर जाता दिखाई दे।
मेरा मक़सद यह नहीं कि, इस ख़ूबसूरत सोमवार की सुबह को मायूसी से शुरु करें।😅
लेकिन मैं सोच रही हूँ कि शायद यही बात एलियाह के साथ १ राजा १९ अध्याय में हुई थी। क्योंकि किसी वजह से वह ऐसी हालत में फँस गया था कि उसने अपनी ज़िंदगी ही ख़त्म हो जाने की दुआ की:
*"फिर वह वहाँ से चलकर एक झाऊ की झाड़ी के नीचे जा बैठा और यह दुआ करने लगा कि वह मर जाए। उसने कहा, ‘बस, ऐ ख़ुदावंद! अब बहुत हो चुका। मेरी जान ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखों से बेहतर नहीं हूँ।’" - १ राजा १९:४
एलियाह को पुराने नियम का सबसे महान नबी माना जाता है और इससे कुछ ही आयत पहले, १ राजा १८:१६-४० में हम पढ़ते हैं कि कैसे उसने अकेले ही ४५० बाल के नबियों को बे-नक़ाब किया, पूरे इस्राएल को पश्चाताप करने के लिए बुलाया और उन सभी झूठे नबियों का अंत करवा दिया। बे-शक़, इस्राएल के इतिहास में इस्राएल के ख़ुदा और मूर्ति पूजा के बीच यह सबसे बड़ा मुक़ाबला था।
फ़िर भी, इतनी बड़ी जीत के बावजूद, एलियाह लगभग इस हद तक टूट गया कि वह जीना ही नहीं चाहता था। 🤯
इस हफ़्ते हम मिलकर जानेंगे कि एलियाह के इस टूटेपन से हम क्या सीख सकते हैं। सबसे पहली बात जो मुझे इस कहानी से समझ आती है, वह यह है कि अगर आप उदास, थके हुए या हारे हुए महसूस करते हैं, तो इसका यह मतलब नहीं कि आपके अंदर ईमान की कमी है या आप रूहानी तौर पर कमज़ोर हैं।
अगर इतिहास के सबसे महान नबियों में से एक भी अपनी ज़िंदगी के ऐसे गहरे अँधेरे दौर से गुज़र सकता है, तो फ़िर आपके लिए भी उम्मीद है। 😉
आज थोड़ा वक़्त निकालकर अपने दिल की हालत पर ग़ौर करें। सच में आपके दिल में क्या चल रहा है? क्या आप बेचैनी, सुक़ून, डर, ख़ुशी या दर्द महसूस कर रहे हैं?
जो भी आप महसूस कर रहे हैं, उसे दुआ में ख़ुदा के सामने ज़रूर रखें। वह आपकी हर बात सुनना चाहता है।