जब परेशानी हार मानने को कहे, ईमान आगे बढ़ने को कहता है।
क्या पिछले कुछ समय से आपका मन हार मानने के लिए कह रहा है? क्या आप सब कुछ छोड़ देने की सोच रहे हैं? ऐसा बिल्कुल न करें।
अब हम नामान की कहानी (२ राजा ५) से मेरी सबसे पसंदीदा सीख पर पहुँच गए हैं। हार न माने!
एलिशा ने नामान से कहा कि वह यरदन नदी में सात बार डुबकी लगाए। ज़रा सोचे, अगर वह छठी डुबकी के बाद ही हार मान लेता! लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
ज़रा सोचे, छठी बार पानी से बाहर आने के बाद वह पल उसके लिए कितना मायूस करने वाला रहा होगा। वह पहले ही अपने घमंड को छोड़ चुका था। वह नदी में उतर चुका था। वह बार-बार डुबकी लगा चुका था। पूरे छह बार!
अगर फ़िर भी कुछ न बदलता तो! उस वक़्त रुक जाना कितना आसान था। लेकिन नामान ने उस सिलसिले को जारी रखा।
और जब वह सातवीं बार पानी से बाहर आया, तो सब कुछ बदल गया। बाइबल कहती है:
*"उसका जिस्म छोटे बच्चे के जिस्म की तरह हो गया और वह पाक साफ़ हुआ।" - २ राजा ५:१४
कई बार जिस बदलाव का हम इंतज़ार कर रहे होते हैं, वह फ़रमाबरदारी के सिर्फ़ एक और क़दम के बाद हमारा इंतज़ार कर रहा होता है।
कई बार ख़ुदा हमें बुलाता है….
एक और दुआ करने के लिए।एक बार और माफ़ करने के लिए।एक बार और ख़ुदा पर भरोसा करने के लिए।
ईमान हमेशा किसी बड़े चमत्कार की तरह नहीं दिखता। अक्सर वह डटे रहने में नज़र आता है। कई बार वह बस हर पल वफ़ादार बने रहने से हासिल होता है। इस सच्चाई से न चुकें!
नामान ने चमत्कार तब तक नहीं देखा, जब तक उसने पूरी प्रक्रिया ख़त्म नहीं की। यही उसूल आज हमारी ज़िंदगी पर भी लागू होता है।
ख़ुदा अक्सर वक़्त के साथ हमारी लगातार फ़रमाबरदारी, भरोसे और सब्र के ज़रिए काम करता है। जब परेशानी हार मानने को कहे, ईमान आगे बढ़ने को कहता है।
शायद आज आप थक चुके हैं, आपको लगता है कि आपने हर कोशिश कर ली है, आप सोच रहे हैं कि क्या ख़ुदा के पीछे चलना सचमुच मेहनत के लायक़ है?
नामान की कहानी मुझे याद दिलाती है कि ख़ुदा के पीछे चलना हमेशा फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि फ़रमाबरदारी के दूसरी तरफ़ बदलाव हमारा इंतज़ार कर रहा होता है।
नामान को सिर्फ़ नया शरीर ही नहीं मिला। वह एक नया दिल लेकर भी लौटा। और आज भी ख़ुदा लोगों की ज़िंदगी, उनके शरीर, उनके मन और उनके हालात को उसी तरह बदलता है।
आज ख़ुदा आपसे ईमान का कौन सा क़दम उठाने के लिए कह रहा है?