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Publication date 18 सित. 2026

कलीसिया दुनिया की सबसे महफ़ूज़ जगहों में से एक होनी चाहिए, जहाँ आप बेझिझक यह मान सकें कि आप ठीक नहीं हैं।

Publication date 18 सित. 2026

आज मैंने अपने एक दोस्त से झूठ बोला। उसने मुझसे पूछा, “आप कैसे हैं?” और मेरा जवाब था, “मैं ठीक हूँ,” जबकि मैं ठीक नहीं था।

अगर मैं सच कहूँ तो मेरे लिए सबसे मुश्किल बातों में से एक यह कहना है, “मैं ठीक नहीं हूँ।”

हममें से ज़्यादातर लोग यह दिखाने में माहिर हो गए हैं कि सब कुछ ठीक है। कोई हमसे पूछता है कि हम कैसे हैं, और हम फ़ौरन कह देते हैं, “मैं ठीक हूँ।” जबकि हम थके हुए होते हैं, हमारा दिल बोझ से भरा होता है, या ऐसा महसूस होता है कि ज़िंदगी बिखर-सी गई है।

लेकिन शिफ़ा की शुरुआत ईमानदारी से होती है।

कल हमने नामान के बारे में बात की थी। उसे एक मुश्किल सच्चाई का सामना करना पड़ा। वह बीमार था और वह ख़ुद को ठीक नहीं कर सकता था।

एक क़ामयाब फ़ौजी सरदार के लिए यह बात मान लेना यक़ीनन बहुत झुकने वाली बात रही होगी। लेकिन अपनी टूटी हुई हालत को मान लेना ही अक्सर ख़ुदा की शिफ़ा पाने की पहली सीढ़ी होती है।

*“अगर हम अपने ग़ुनाहों का इक़रार करें, तो वह वफ़ादार और धर्मी है और हमारे ग़ुनाहों को माफ़ करेगा और हमें नापाक से पाक़ करेगा।” - १ यूहन्ना १:९

इक़रार शर्मिंदगी के लिए नहीं होता। यह आज़ादी पाने का रास्ता है।

जब हम अपनी ज़रूरत को ख़ुदा के सामने मान लेते हैं, तब हम उसकी नेमत को अपनी ज़िंदगी में काम करने का मौक़ा देते हैं।

कलीसिया दुनिया की सबसे महफ़ूज़ जगहों में से एक होनी चाहिए, जहाँ हम खुलकर यह कह सकें कि हम ठीक नहीं हैं। हर इंसान अपने साथ किसी न किसी तरह की टूटन लेकर चलता है। टूटे हुए ख़्वाब, टूटे हुए रिश्ते और टूटी हुई उम्मीदें।

लेकिन ख़ुशख़बरी यह है कि ख़ुदा हमे पुनर्स्थापित करने में माहिर है।

वह यह उम्मीद नहीं करता कि हम उसके पास आने से पहले सब कुछ ठीक कर लें। वह बस चाहता है कि हम ईमानदारी के साथ उसके पास आएँ।

जिस पल हम दिखावा करना छोड़ देते हैं, अक्सर वही पल असली शिफ़ा की शुरुआत बन जाता है।

इसलिए आज मैं ईमानदारी को चुन रहा हूँ। मैं अपनी ग़लतियों को मान रहा हूँ। अपनी मायूसियों को मान रहा हूँ। और अपनी इस ज़रूरत को भी मान रहा हूँ कि मुझे ख़ुदा की ज़रूरत है। और यह कमज़ोरी नहीं, सच्चा ईमान है!

आओ मिलकर दुआ करें:

ऐ आसमानी पिता, मेरी मदद कर कि जब मैं ठीक न हूँ, तब मैं यह दिखावा करना छोड़ दूँ कि सब ठीक है। मुझे हिम्मत दे कि मैं अपनी टूटी हुई हालत तेरे सामने ले आऊँ। तेरा शुक्रिया कि तू मुझे अपने फ़ज़्ल, माफ़ी और शिफ़ा के साथ अपनाता हैं। मुझे सिखा कि मैं ईमानदारी के साथ जीऊँ और तेरी पुनर्स्थापित करने वाली क़ुदरत पर भरोसा रखूँ। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

आप एक चमत्कार हैं।

Cameron Mendes
Author

Worship artist, singer-songwriter, dreamer and passionate about spreading the Gospel.