हम चमत्कार चाहते हैं, नम्रता नहीं। हम क़ामयाबी चाहते हैं, फ़रमाबरदारी नहीं। हम शिफ़ा चाहते हैं, लेकिन ख़ुद को ख़ुदा के हवाले नहीं करना चाहते।
क्या कभी ख़ुदा ने आपसे ऐसा कुछ करने के लिए कहा है जो थोड़ा अजीब-सा लगता हो?
बाइबल में मायूसी की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक नामान की है। और आने वाले कुछ दिनों में हम उसकी कहानी को और गहराई से समझेंगे। (जी हाँ, इसमें आपको पानी में डुबकी लगाना भी शामिल है! 😉)
नामान एक ताक़तवर फ़ौजी सरदार था। लोग उसकी बहुत इज्ज़त करते थे। वह क़ामयाब था, असरदार भी और बाइबल उसे एक महान योद्धा बताती है।
लेकिन एक बड़ी समस्या थी। उसे कोढ़ था।
यह बीमारी धीरे-धीरे उसके जिस्म को खोखला कर रही थी। यह बिमारी दर्दनाक, उसे इंसान से अलग करनेवाली और आख़िरकार उसकी जान ले सकती थी। नामान के पास ताक़त भी थी और प्रभाव भी, लेकिन वह इस दुश्मन को हरा नहीं सका।
आख़िरकार उसने एक नबी, एलीशा के बारे में सुना, जो शायद उसकी मदद कर सकता था। इसलिए नामान अपने साथ तोहफ़े, धन और अपने राजा का एक सरकारी ख़त लेकर एक चमत्कार की तलाश में इस्राएल गया।
लेकिन चमत्कार वैसे नहीं हुआ, जैसा उसने सोचा था।
एलीशा ख़ुद उससे मिलने नहीं आया, उसने अपने एक सेवक के हाथ बस एक सीधी-सी हिदायत भेजी। जा और यरदन नदी में सात बार डुबकी लगा। नामान ग़ुस्से से भर गया:
"लेकिन नामान ग़ुस्से में वहाँ से चला गया और कहने लगा, 'मैंने तो सोचा था कि वह ज़रूर बाहर आएगा, ख़ुदा का नाम लेकर पुकारेगा, उस जगह पर अपना हाथ घुमाएगा और मुझे मेरे कोढ़ से शिफ़ा देगा।'" - २ राजा ५:११
नामान सिर्फ़ बीमार नहीं था। वह परेशान भी था।
उसे उम्मीद थी कि सब कुछ बहुत शानदार, असरदार और उसकी रूतबे के मुताबिक़ होगा। लेकिन उससे एक बहुत ही आसान और फ़रमाबरदारी दिखाने वाला काम करने के लिए कहा गया।
यहीं पर हममें से बहुत से लोग ठोकर खाते हैं। हम चाहते हैं कि ख़ुदा हमारे तरीक़े से काम करे। हम चमत्कार चाहते हैं, नम्रता नहीं। हम क़ामयाबी चाहते हैं, फ़रमांबरदारी नहीं। हम शिफ़ा चाहते हैं, लेकिन ख़ुद को ख़ुदा के हवाले नहीं करना चाहते।
आज आप ख़ुदा से क्या माँग रहे हैं? और क्या आपने कभी सोचा है कि ख़ुदा आपसे क्या चाहता है?