आपकी हदें, ख़ुदा की हदें नहीं हैं।
सच कहूँ, आज मेरी गाड़ी एक दूसरी गाड़ी से टकराने ही वाली थी और उसी पल मेरे अंदर ग़ुस्सा भड़क उठा। उसी वक़्त मैंने ऐसी बातें कहीं और मेरे दिल में ऐसे ख़याल आए, जिन पर मुझे फ़ख़्र नहीं है। फ़िर जब मैंने यीशु मसीह के सामने पश्चाताप किया, तो मैं गहराई से सोचने लगा।
हर इंसान की एक आख़री हद होती है, जहाँ उसका सब्र जवाब देने लगता है। आपकी टूटेपन की हद क्या है?
एक ऐसा पल आता है, जब सब्र जवाब देने लगता है, सारे रास्ते बंद नज़र आते हैं और मायूसी अपनी आख़री हद तक पहुँच जाती है। कई बार छोटी-छोटी बातें, जैसे टीवी के रिमोट का काम न करना, ट्रैफ़िक में फँस जाना, या इंटरनेट का बार-बार बंद हो जाना, हमें थोड़ा-थोड़ा परेशान करती रहती हैं। फ़िर देखते ही देखते यही छोटी परेशानियाँ इकट्ठी होकर हमें हमारी आख़री हद तक पहुँचा देती हैं।
लेकिन ज़िंदगी में इससे भी बड़े इम्तेहान आते हैं: नौकरी छूट जाना, किसी अपने को खो देना, रिश्तों का टूट जाना, बीमारी, ठुकराया जाना और आने वाले दिनों की बे-यक़ीनी।
ऐसे लम्हों में हम सोचने लगते हैं कि आख़िर ख़ुदा कहाँ है और ज़िंदगी इतनी भारी क्यों महसूस हो रही है। लेकिन सालों के तजुर्बे ने मुझे एक बात सिखाई है। हमारी आख़री हद ही कई बार हमारी नई शुरुआत बन जाती है।
बाइबल ऐसे लोगों से भरी पड़ी है, जो अपने टूटेपन के आख़री हद तक पहुँच गए थे। दाऊद अपने ग़ुनाह की वजह से टूट गया था। पतरस अपनी नाक़ामी की वजह से। और एलियाह थकान और डर की वजह से अपने सब्र के आख़री हद तक पहुँच गया था।
फ़िर भी, ख़ुदा ने उन सब से वहीं आकर मुलाक़ात की।
अक्सर ऐसा होता है कि ख़ुदा अपना सबसे गहरा काम तभी करता है, जब हम अपने सब्र के आख़री हद तक पहुँच जाते हैं।
जब हमारी अपनी ताक़त जवाब दे देती है, तभी हमें एहसास होता है कि ख़ुदा की ताक़त सचमुच कितनी अज़ीम है।
*“मेरा फ़ज़्ल तेरे लिए काफ़ी है, क्योंकि मेरी क़ुदरत कमज़ोरी में पूरी होती है।” - २ कुरिन्थियों १२:९
मेरे टूटेपन की आख़री हद मुझे यह याद दिलाती है कि मुझे कभी भी ज़िंदगी का बोझ अकेले उठाने के लिए नहीं बनाया गया है। यह उस वहम को तोड़ देती है कि मैं सब कुछ अपने दम पर संभाल सकता हूँ। जब मेरी अपनी ताक़त ख़त्म हो जाती है, तभी मैं ख़ुदा की ताक़त पर भरोसा करना सीखता हूँ।
इसलिए, अगर आज आप अपने टूटेपन की आख़री हद तक पहुँचा हुआ महसूस कर रहे हैं, अगर मायूसी आपको टूटने की कगार तक ले जा रही है, तो यह बात याद रखें। आपकी हदें, ख़ुदा की हदें नहीं हैं।
बल्कि, अक्सर वह अपना सबसे बड़ा काम वहीं से शुरू करता है।