फ़ज़्ल ख़ुदा की पेशकश है और ईमान हमारा जवाब है।
आज सुबह जब मैं दौड़ने के लिए निकली, तो अचानक मेरे मन में एक ख़याल आया: फ़ज़्ल ख़ुदा की पेशकश है और ईमान हमारा जवाब है।
बाइबल यह फ़रमाती है:
*“तुमने उसे देखा नहीं, फ़िर भी उससे मोहब्बत रखते हो और अब भी उसे देखे बिना उस पर ईमान रखते हो और ऐसी बयान से बाहर और जलाली ख़ुशी से भर जाते हो, क्योंकि तुम अपने ईमान का मक़सद, यानी अपनी आत्मा का उद्धार पा रहे हो।” - १ पतरस १:८-९ HINOVBSI
ईमान सिर्फ़ किसी बात से सहमत हो जाने का नाम नहीं है। यह सिर्फ़ यीशु मसीह के बारे में कुछ सच्चाइयों को मान लेना भी नहीं है। ईमान का मतलब है भरोसा। यानी अपने पूरे वजूद का सहारा उस पर रख देना और यक़ीन करना कि वह आपको थामे रख सकता है।
मैं पूरे यक़ीन के साथ यह मान सकती हूँ कि मैं WPL में खेल सकती हूँ, लेकिन सिर्फ़ मेरा यक़ीन कर लेना उसे सच नहीं बना देता। ईमान इस बात पर निर्भर नहीं करता कि मैं कितनी मज़बूती से यक़ीन करती हूँ। बल्कि इस बात पर कि मैं किस पर ईमान रखती हूँ।
ईमान रखने का मतलब है यह कहना, “यीशु मसीह, मैं तुझ पर भरोसा करती हूँ। मुझे यक़ीन है कि तू वही हैं, जो तूने ख़ुद के बारे में बताया। मुझे यक़ीन है कि तूने मेरे लिए वही किया, जो तूने वादा किया था। मुझे यक़ीन है कि तेरी मौत और तेरा ज़िंदा होना मेरे लिए काफ़ी है।”
रोमियों १०:९-१० हमें एक वादा, एक पक्का भरोसा और ईमान का इज़हार कराता है।
*“अगर तुम अपने मुँह से इकरार करो कि ‘यीशु मसीह ख़ुदावंद हैं’ और अपने दिल में ईमान रखो कि ख़ुदा ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तुम उद्धार पाओगे। क्योंकि इंसान दिल से ईमान लाता है और रास्तबाज़ ठहराया जाता है और मुँह से इकरार करता है और उद्धार पाता है।”
ईमान एक व्यक्तिगत बात है। यह एक रिश्ते की बात है। ख़ुद को ख़ुदा के हवाले कर देना है।
आज के चमत्कार का प्रोस्ताहन यह है कि जब आप ख़ुदा पर ईमान रखते हैं, तो उसका असर सिर्फ़ आज तक नहीं, बल्कि अब्दी ज़िंदगी तक रहता है।
आओ, मिलकर दुआ करें:
यीशु मसीह, मैं मेरा पूरा भरोसा तुझ पर रखती हूँ। जहाँ मेरा ईमान कमज़ोर है, वहाँ उसे मज़बूत कर। मेरी मदद कर कि मैं अपने जज़्बातों पर नहीं, अपनी कोशिशों पर नहीं, बल्कि उस काम पर भरोसा करूँ, जिसे तूने मेरे लिए मुक़म्मल किया हैं। मुझे उस ख़ुशी से भर दे, जो तुझ पर भरोसा करने से मिलती है। आमीन।