उद्धार का मतलब है कि ख़ुदा आपकी मुश्किल में उतरकर कहता है, "मैं आपके साथ हूँ।"
एक बार हम एक कॉन्सर्ट के लिए सफ़र कर रहे थे, रास्ते में हमारे ड्राइवरों में से एक को नींद लगी और गाड़ी सड़क किनारे पहाड़ी से जा टकराई। शुक्र है कि गाड़ी दूसरी तरफ़ नहीं मुड़ी, क्योंकि वहाँ गहरी खाई थी। यह ख़ुदा का एक बड़ा चमत्कार था कि किसी को भी चोट नहीं लगी। उस दिन ख़ुदा ने हमें एक बड़े हादसे से बचा लिया।
जब हम कहते हैं कि हमें "बचाया गया", तो एक सवाल उठता है, “किससे बचाया गया?”
अगर कोई पानी में डूब रहा हो और आप उसे पानी से बाहर निकाल लें, तो वह मौत से बच जाता है। उसी तरह, अगर आप बॉक्सिंग में मुक्केबाज़ी कर रहे हों और राउंड ख़त्म होने की घंटी बज जाए, तो आप और ज़्यादा मार खाने से बच जाते हैं।
तो जब हम बचाए जाने की बात करते हैं, तो हमें भी यही सवाल पूछना चाहिए, किससे बचाया जाना?
बाइबल हमें बताती है कि हमें ग़ुनाह की ताक़त और उसके अंजाम से बचाया गया है। शायद आज यह लफ्ज़ लोगों को ज़्यादा पसंद न आए, लेकिन यह सच्चाई है। ग़ुनाह सिर्फ़ “बुरा काम करना नहीं है।” ग़ुनाह वह हालत है, जिसमें इंसान ख़ुदा से जुदा हो जाता है। यह उस तेज़ धारा की तरह है, जो हमें अपने साथ बहाकर डुबो देना चाहती है।
पौलुस लिखता है, "तुम अपने अपराधों और ग़ुनाहों की वजह मरे हुए थे।" (इफ़िसियों २:१) मरे हुए। सिर्फ़ कमज़ोर नहीं। सिर्फ़ बीमार नहीं। बल्कि रूहानी तौर पर मरे हुए थे। यह एक ऐसी हक़ीक़त है, जो हमें गहराई से सोचने पर मजबूर करती है।
लेकिन ख़ुशख़बरी यह है कि: ख़ुदा हमें उसी हालत में नहीं छोड़ता।
मैंने बहुत-से लोगों को यह कहते सुना है, "मैं ठीक हूँ। मुझे बचाए जाने की ज़रूरत नहीं।" लेकिन सच तो यह है कि हम सब गहरे पानी में डूब रहे थे। उद्धार पाने का पहला क़दम यह मानना है कि हमें उसकी ज़रूरत है। हम ख़ुद को नहीं बचा सकते। हम अपनी कोशिशों के दम पर किनारे तक नहीं पहुँच सकते। हमें किसी ऐसे की ज़रूरत है, जो बाहर से आकर, हमारा हाथ पकड़े और हमें बाहर निकाल ले।
उद्धार का मतलब यह हैं कि हम ग़ुनाह की ताक़त और उसके अंजाम से रूहानी छुटकारा पातें है। यह तब होता है जब ख़ुदा हमारी टूटी हुई ज़िंदगी में क़दम रखता है और कहता है, "मैं आपके साथ हूँ।"
आज का चमत्कार भी यही है। ख़ुदा आपसे कहता है, "मैं आपके साथ हूँ।"
आओ, मिलकर दुआ करें:
ऐ आसमानी पिता, मैं मानती हूँ कि मुझे तेरी ज़रूरत है। मैं ख़ुद को नहीं बचा सकती। मैं मानती हूँ कि मैंने ग़ुनाह किया है और तेरे जलाल से महरूम रही हूँ। तेरा शुक्रिया कि तूने मुझे मेरी उसी हालत में नहीं छोड़ दिया। शुक्रिया कि तू मेरी ज़िंदगी में आया और मुझे बचाया। मेरी मदद कर कि मैं साफ़-साफ़ समझ सकूँ कि तूने मुझे किस चीज़ से बचाया है और मेरा दिल हमेशा तेरे लिए शुक्रगुज़ारी से भरा रहे। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।