ऐ मेरे मन, ख़ुदावंद को मुबारक़ कह और उसकी किसी भी नेमत को न भूलना।
आज हम उस सफ़र के आख़री दिन पर पहुँच गए हैं, जिसमे अब तक हमने जाना कि कैसे दाऊद ने अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुज़रतें हुए, ख़ुदा में ताक़त पाई। (१ शमूएल ३०:६)
पास्टर बिल जॉनसन, जिन्होंने "ख़ुदा में ताक़त पाने" के विषय पर एक क़िताब लिखी है:
"ख़ुदा चाहता है कि हम उसी के ज़रिए अपने आपको मज़बूत करना सीखें, क्योंकि जब हम रूहानी तौर पर मज़बूत होना सीखते हैं, तो हम लंबे समय तक उसके साथ वफ़ादारी से चलते रह सकते हैं। इसकी ज़रूरत इसलिए है, क्योंकि हमारी बुलाहट और पूरी क़ाबिलियत कुछ ही सालों में पूरी नहीं होती, बल्कि इस धरती पर हमारी पूरी ज़िंदगी बिताने पर मुक़म्मल होती है।"
अब तक हमने ख़ुदा में ताक़त पाने की ये बातें सीखी हैं:
- सोच से शुक्रगुज़ारी की ओर।
- मुश्किलों से इबादत की ओर।
- शिकायतों से इबादत की ओर।
- समझौतों से ख़ुदा के वादों की ओर।
- उदासी से ख़ामोशी की ओर जाए।
और आज की आख़री बात है: आँसुओं से गवाही की ओर जाए।
इसका मतलब यह है कि अपनी ज़िंदगी की परेशानियों या उन दुआओँ में अटके न रहना, जिनका जवाब आपको अभी तक नहीं मिला हो। बल्कि उन सब भलाईयों को याद करना शुरू करें, जो ख़ुदा ने पहले ही आपके लिए की हैं। उसकी वफ़ादारी को याद करें और उसकी गवाही दे।
इसका एक ख़ूबसूरत उदाहरण हमें भजन संहिता १०३ में मिलता है, जहाँ दाऊद लिखता है:
*"ऐ मेरे मन, ख़ुदावंद को मुबारक़ कह और उसकी किसी भी नेमत को न भूलना।वही तेरे सारे ग़ुनाह माफ़ करता है।वही तेरी सारी बीमारियों को शिफ़ा देता है।वही तेरी ज़िंदगी को गढ़े से छुड़ाता है।वही तुझे अपनी मोहब्बत और रहमत का ताज पहनाता है।वही तेरी ख़्वाहिशों को अच्छी चीज़ों से पूरा करता है, ताकि तेरी जवानी उक़ाब की तरह फ़िर से ताज़ा हो जाए।ख़ुदावंद सब ज़ुल्मो के लिए इंसाफ़ और रास्तबाज़ी का काम करता है।उसने अपनी राहें मूसा पर ज़ाहिर कीं, और अपने काम इस्राएल को दिखाए।ख़ुदावंद रहमदिल और मेहरबान है, ग़ुस्सा करने में धीमा और मोहब्बत से भरपूर है।"
आज मैं आपको प्रोत्साहित करता हूँ कि आप भी एक सूची बनाए। उसमें उन सभी तरीक़ों को लिखे, जिनमें आपने अपनी ज़िंदगी में ख़ुदा की वफ़ादारी देखी है। और फ़िर उसके लिए उसका शुक्र अदा करना न भूलें। 😉
मुझे उम्मीद है कि "ख़ुदा में अपनी ताक़त पाए" यह सीरीज़ आपके लिए बरक़त कि वजह बनी होगी। अगर इससे किसी भी तरह से आपकी मदद हुई है, तो मुझे ज़रूर बताए। मुझे आपकी गवाही सुनकर बहुत ख़ुशी होगी।