लेकिन मैंने तेरी रहमत पर भरोसा रखा है; मेरा दिल तेरे उद्धार से ख़ुशी मनाएगा।
इस हफ़्ते हम इस बात पर ग़ौर कर रहे हैं कि दाऊद ने अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुज़रतें हुए, ख़ुदा में कैसे ताक़त पाई। (१ शमूएल ३०:६)
दाऊद की ज़िंदगी में ऐसे कई मौके आए, जब ख़ुदा में ताक़त पाना उसके लिए बेहद ज़रूरी था। हालाँकि दाऊद इस्राएल का सबसे महान राजा के तौर पर जाना जाता था और उसने बहुत सारी जीत हासिल कीं, लेकिन उसकी ज़िंदगी लगातार जंगों, मुश्किलों और दर्द भरे दौरों से भी गुज़री।
दाऊद की एक और पहचान यह है कि उसने भजन संहिता की क़िताब में सबसे ज़्यादा भजन लिखें हैं। उसने अपनी ज़िंदगी के हर दौर में अपने दिल के एहसासात और ख़्वाहिशों को ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ दिए हैं। उसके भजन सिर्फ़ ख़ुशी या क़ामयाबी के दिनों में ही नहीं लिखें गए, बल्कि ज़्यादा-तर भजन दर्द और तकलीफ़ो के दौर में लिखे गए थें।
मिसाल के तौर पर:
- जब शाऊल उसका पीछा कर रहा था, तब उसने भजन संहिता ५९ लिखा।
- जब वह गत (नगर) में क़ैद था, तब उसने भजन संहिता ५६ लिखा।
- जब वह अबशालोम से भाग रहा था, तब उसने भजन संहिता ३ लिखा।
- जब वह यहूदा के जंगल में छिपा हुआ था, तब उसने भजन संहिता ६३ लिखा।
आज की सीख यह है कि अपनी मुश्किलों को ख़ुदा की इबादत का ज़रिया बना दो।
मेरा मतलब यह है कि अपने एहसासात को अल्फ़ाज़ में बदल दो। चाहे आप डायरी में कोई गीत लिखें, शायरी या फ़िर कविता। अपने दिल की बात ज़ाहिर करना मुश्किलों से सही तरीक़े से निपटने की तरफ़ एक अहम क़दम हैं और दाऊद इस बात में माहिर था।
मेरे सबसे मशहूर गीतों में से एक,"तुमसा", यह गीत मेरी ज़िंदगी के एक दर्दभरे दौर में मैंने लिखा था। और इस वक़्त मैं एक नए अल्बम पर काम कर रहा हूँ, जिसके ज़्यादातर गीत पिछले साल मार्च में मेरे बेटे ज़ैक के इंतक़ाल के बाद मेरे दिल से निकले हैं।
लेकिन मैं आपको पहले ही बता दूँ, जब आप अपने दिल की सबसे गहरी बातें ख़ुदा के सामने कहना शुरू करेंगे, तो मुमक़िन है कि आपका नज़रिया बदल जाए। जो बात शिकायत से शुरू होती है, वह अक्सर ख़ुदा की इबादत पर ख़त्म होती है।
दाऊद के साथ बार-बार ऐसा ही हुआ। मिसाल के तौर पर, भजन संहिता १३ की शुरुआत वह इन अल्फ़ाज़ से करता है:
*"ऐ ख़ुदावंद, कब तक? क्या तू मुझे हमेशा के लिए भूल जाएगा? कब तक तू अपना चेहरा मुझसे छिपाए रखेगा?"
लेकिन उसी भजन का अंत वह इन अल्फ़ाज़ो से करता है:
*"लेकिन मैंने तेरी रहमत पर भरोसा रखा है। मेरा दिल तेरे उद्धार से ख़ुशी मनाएगा।"
और यही है ख़ुदा में ताक़त पाने का असली मतलब।