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Publication date 29 अग. 2026

मेरी आँखों को खोल ताकि मैं तेरी क़ानून की अद्भुत बातें देख सकूँ।

Publication date 29 अग. 2026

मेरे पास एक धूप का चश्मा (गॉगल) है, जो मुझे बहुत पसंद है। वह इतना आरामदायक है कि कई बार मैं भूल जाती हूँ कि मैंने उसे पहना हुआ है, यहाँ तक कि जब धूप भी नहीं रहती, तब भी वह मेरी आँखों पर लगा रहता है।

लेकिन जैसे ही मैं उसे उतारती हूँ, पूरी दुनिया ज़्यादा रौशन और रंगों से भरी हुई दिखाई देने लगती है। ऐसा लगता है मानो मुझे एक नई नज़र मिल गई हो।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है?

ऐसा ही हमारी रूहानी आँखों के साथ भी हो सकता है। जब हमारी नज़र ग़लत चीज़ों पर टिक जाती है, तो हमारी रूहानी नज़र धुँधली पड़ने लगती है। लेकिन ख़ुदा हमारी नज़र को नया करना चाहता है, ताकि हम सिर्फ़ वही न देखें जो दुनिया देखती है, बल्कि वह भी देखें जो ख़ुदा देखता है।

जब पौलुस की पहली मुलाक़ात यीशु मसीह से हुई, तो वह अंधा हो गया प्रेरितों ९। बाद में, जब ख़ुदा ने उसे अपना प्रेरित बनने के लिए बुलाया, तब "उसकी आँखों से मानो छिलके गिर पड़े और वह फ़िर से देखने लगा।" प्रेरितों के काम ९:१८ 

मैं सोचती हूँ कि इस अनुभव ने पौलुस को साफ़ देखने की अहमियत अच्छी तरह समझा दी होगी। इसलिए जब ख़ुदा ने उसे ग़ैर यहूदियों के पास भेजा, तो उससे कहा:

"उनकी आँखें खोल, ताकि वे अँधेरे से उजाले की ओर और शैतान के इख़्तियार से ख़ुदा की ओर फिरें, जिससे वे ग़ुनाहों की माफ़ी पाएँ और उन लोगों के साथ विरासत में हिस्सा पाएँ, जो मुझ पर ईमान लाने से पाक ठहराए गए हैं।" - प्रेरितों के काम २६:१८

ख़ुदा यहाँ उनकी जिस्मानी आँखों की नहीं, बल्कि उनकी रूहानी आँखों की बात कर रहा था। वही आँखें, जो सही और ग़लत, अँधेरे और उजाले के बीच फ़र्क़ पहचानती हैं।

बाद में इफ़िसियों की क़िताब में पौलुस अपने दोस्तों के लिए यह दुआ करता है,

"मैं दुआ करता हूँ कि तुम्हारे दिल की आँखें रौशन हो जाएँ, ताकि तुम उस उम्मीद को जान सकों, जिसके लिए उसने तुम्हे बुलाया है, और उसकी महिमा से भरी विरासत की दौलत को पहचान सकों।" - इफ़िसियों १:१८

आप भी ख़ुदा से दुआ कर सकते हैं कि वह आपके दिल की आँखों को नया कर दे, ताकि आप उसे फ़िर से साफ़-साफ़ देख सकें। आप भजन संहिता ११९:१८ की इस दुआ को भी अपना सकते हैं:

"मेरी आँखें खोल दे, ताकि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूँ।"

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.