ख़ुदा का कार्य किसी तबाही पर रुकता नहीं है।
प्रेरितों के काम की क़िताब के हमारे इस सफ़र के आख़री दिन में आपका स्वागत है। क्या आपने इस सफ़र का लुफ़्त उठाया है?
अगर आप इस सफ़र को दोबारा तय करना चाहते हैं, या आपसे कोई दिन छूट गया हो, तो मेरे पास आपके लिए एक अच्छी ख़बर है। हमने इस पूरी सीरीज़ को एक ई-बुक में बदल दिया है, जिसमें हर अध्याय के साथ कुछ और ख़ास बातें और मनन करने के लिए सवाल भी शामिल हैं। आप इसे हमारी वेबसाइट से मुफ़्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
हालाँकि प्रेरितों के काम, अध्याय २८ आख़री अध्याय है, लेकिन शायद यही सबसे ज़्यादा घटनाओं से भरपूर अध्याय भी है।
जहाज़ के डूबने के बाद पौलुस और बाकी मुसाफ़िर किसी तरह तैरकर माल्टा द्वीप पर पहुँचते हैं। वहाँ के लोग उनका बहुत मेहरबानी और रहमदिली से स्वागत करते हैं और ठंड से बचाने के लिए आग जलाते हैं।
जब पौलुस आग के लिए लकड़ियाँ डाल रहा होता है, तभी एक ज़हरीला साँप उसके हाथ को काटता है। द्वीप के लोग तुरंत सोचते हैं कि यह किसी पाप या सज़ा का संकेत है। लेकिन सबकी हैरानी के बीच पौलुस साँप को झटक देता है और उसे कोई नुकसान नहीं होता।
बाद में इसी अध्याय में पौलुस पुबलियुस के पिता को शिफ़ा देता है और फ़िर कई बीमार लोग उसके पास लाए जाते हैं और वे भी शिफ़ा पाते हैं। जो शुरुआत एक जहाज़ के टूटने से हुई थी, वही आगे चलकर एक ऐसा मंज़र बन जाता है जब ख़ुदा की क़ुदरत बहुत से लोगों के सामने ज़ाहिर होती है।
ऐसा लगता है कि मुश्किलें एक के बाद एक बढ़ती ही जा रही थी, पहले तूफ़ान, फ़िर जहाज़ का टूटना और फ़िर साँप का काटना भी। ज़िंदगी में परेशानियाँ कभी-कभी लगातार आती रहती हैं। जब लगता है कि अब सबकुछ सही चल रहा है, तभी कुछ मुश्किलात सामने आ जातें है।
फ़िर भी यह अध्याय दिखाता है कि ख़ुदा का कार्य किसी तबाही पर रुकता नहीं है।
जहाज़ का टूटना पौलुस के सफ़र का अंत नहीं था। यहाँ तक कि साँप का काटना भी ख़ुदा की योजना को रोक नहीं सका। जो चीज़ ख़तरा लग रही थी, वही आगे चलकर ख़ुदा की क़ुदरत दिखाने का एक मौक़ा बन गई।
प्रेरितों के काम की क़िताब यहीं ख़त्म नहीं होती, बल्कि आख़री कुछ घटनाओं की शुरुआत करती हैं। क्योंकि ख़ुदा की बादशाहत की ख़ुशख़बरी सुनाने की यह कहानी आज भी जारी है। इस कहानी में हमारा भी एक अहम किरदार है!
आओ मिलकर दुआ करें:
ऐ आसमानी पिता, तेरा शुक्रिया कि तेरा कार्य जारी रहता है, चाहे हालात मेरे ख़िलाफ़ ही क्यों न हों। मुझे यह सीखा कि मैं तेरें मंसूबों पर भरोसा करूँ, क्योंकि वह कभी थमतें नहीं और मेरी ज़िंदगी को इस तरह इस्तेमाल कर कि दूसरों के सामने तेरी ताक़त ज़ाहिर हो सके। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।