आपकी कहानी भी ख़ुदा इस्तेमाल कर सकता है।
क्या आप हमेशा अपनी गवाही बाँटने और यह बताने के लिए तैयार रहते हैं कि ख़ुदा ने आपकी ज़िंदगी में क्या-क्या किया है?
काश मैं भी अपने बारे में ऐसा कह पाता। मुझे लोगों से बात करना और ख़ुशख़बरी सुनाना बहुत पसंद है, लेकिन मैं चाहता हूँ कि इस मामले में मैं पौलुस की तरह बनूँ, जिसने कभी भी अपनी ज़िंदगी में ख़ुदा की क़ुदरत के कामों की गवाही देने का मौक़ा नहीं छोड़ा।
प्रेरितों के काम अध्याय २६ में हम पढ़ते हैं, पौलुस को एक बार फ़िर अपना बचाव करना पड़ता है, इस बार राजा हेरोद अग्रिप्पा और फ़ेस्तुस के सामने। दो ताक़तवर हाकिम, एक ऐसा दरबार जो इख़्तियार से भरा हुआ है और उनके बीच पौलुस खड़ा है। वह इस मौक़े का इस्तेमाल यह बताने के लिए करता है कि ख़ुदा ने उसकी ज़िंदगी में क्या किया है।
पौलुस अपनी कहानी सुनाता है, कैसे वह पहले मसीहियों पर ज़ुल्म करता था, लेकिन डमस्कस के रास्ते में उसकी मुलाक़ात यीशु मसीह से हुई और उस एक मुलाक़ात ने उसकी पूरी ज़िंदगी बदल दी। जो पहले सताने वाला था, वही अब गवाही देने वाला बन गया।
पौलुस अपने ईमान से शर्मिंदा नहीं होता।
वह सच्चाई और पूरे यक़ीन के साथ बोलता है। उसका मक़सद सिर्फ़ अपना बचाव करना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि सुसमाचार एक सच्चाई है। यही बात राजा अग्रिप्पा के जवाब से भी साफ़ होती है: “क्या तू थोड़े ही समय में मुझे मसीही बना लेना चाहता है?” (प्रेरितों के काम २६:२८)
बहुत से लोग सोचते हैं कि यीशु मसीह की गवाही देना सिर्फ़ प्रचारकों या मिशनरियों का काम है। लेकिन पौलुस दिखाता है कि इसकी शुरुआत एक साधारण बात से होती है, यह बताने से कि ख़ुदा ने आपकी ज़िंदगी में क्या किया है। अपनी गवाही में पौलुस तीन बातें बताता है:
- वह पहले कैसा था।
- उसकी मुलाक़ात यीशु मसीह से कैसे हुई।
- उस मुलाक़ात के बाद उसकी ज़िंदगी में क्या तब्दीली आई।
आप भी ऐसा कर सकते हैं! हो सकता है कि आपका “डमस्कस का अनुभव” उतना दिलचस्प न रहा हो, लेकिन आपकी कहानी भी ऐसी गवाही है जिसे ख़ुदा इस्तेमाल कर सकता है।
आज मैं आपको एक चुनौती देना चाहता हूँ। अपनी गवाही लिखें। इसे सरल रखें और उन तीन बातों का पालन करें, जिनका इस्तेमाल पौलुस ने किया था। इसे कई बार दोहराए और दुआ करें कि अगली बार जब आपको मौक़ा मिले, तो आप पूरे भरोसे के साथ बता सकें कि ख़ुदा ने आपकी ज़िंदगी में क्या किया है।