• HI
    • AR Arabic
    • CS Czech
    • DE German
    • EN English
    • ES Spanish
    • FA Farsi
    • FR French
    • HI Hindi
    • HI English (India)
    • HU Hungarian
    • HY Armenian
    • ID Bahasa
    • IT Italian
    • JA Japanese
    • KO Korean
    • MG Malagasy
    • MM Burmese
    • NL Dutch
    • NL Flemish
    • NO Norwegian
    • PT Portuguese
    • RO Romanian
    • RU Russian
    • SV Swedish
    • TA Tamil
    • TH Thai
    • TL Tagalog
    • TL Taglish
    • TR Turkish
    • UK Ukrainian
    • UR Urdu
    • VI Vietnamese
Publication date 18 अग. 2026

ख़ुदा कमज़ोर और टूटे हुए लोगों के ज़रिए भी काम करता है।

Publication date 18 अग. 2026

जब से हम प्रेरितों के काम की क़िताब में पौलुस की कहानी पढ़ रहे हैं, मुझे बार-बार ऐसा लगता है कि उसकी ज़िंदगी में मुश्किलें कभी ख़त्म ही नहीं हुईं। ऐसा लगता था मानो जहाँ भी वह जाता, मुसीबतें उसका पीछा करती थीं। 

प्रेरितों के काम अध्याय २३ में, पौलुस फ़िर से सन्हेद्रिन (यहूदियों की सर्वोच्च धार्मिक और न्यायिक परिषद) के सामने खड़ा होता है, जहाँ वह एक बार फिर विरोधी नेताओं से घिरा होता है। बहस बढ़ जाती है, लेकिन पौलुस समझ जाता है कि फरीसियों और सदूकियों के बीच एकता नहीं है और वह उसी पर बात को मोड़ देता है। 

हालात तनावपूर्ण, गड़बड़ी और क़ाबू से बाहर होते जा रहें थें। और शायद यही बात इस अध्याय को इतना मानवीय बनाती है। 

पौलुस कोई अछूता या मुक़म्मल अगुआ नहीं था। जब उसके साथ नाइंसाफ़ी होती है और उसे मारा जाता है, तो वह भारी जवाब देता है। यहाँ तक कि जब उसे पता चलता है कि उसने महायाजक को संबोधित किया है, तो उसे अपने लफ्ज़ वापस लेने पड़ते हैं। पाकीज़गी मानवता को ख़त्म नहीं करती। ख़ुदा कमज़ोर और टूटे हुए लोगों के ज़रिए भी काम करता है।

हालात इतने बिगड़ जातें है कि रोमी सैनिक उसे महफूज़ जगह पर ले जाते हैं। फ़िर रात में, जब शोर-शराबा थम जाता है और पौलुस अकेला होता है, ख़ुदा उसके पास आकर कहता हैं:

“उसी रात ख़ुदावंद पौलुस के पास आ खड़ा हुआ और कहा, “हौसला रख, क्योंकि जिस तरह तूने यरूशलेम में मेरे बारे में गवाही दी है, लाज़िम है कि इसी तरह रोम शहर में भी गवाही दे।” (प्रेरितों के काम २३:११)

वह कोई लंबा भाषण नहीं देता और न ही कोई नया रास्ता दिखाता है, बल्कि अपनी मौजुदगी का सुक़ून और आगे बढ़ने का साहस देता है। इसलिए मिशन जारी रहता है, ख़तरे के बीच भी।

इसी बीच, कुछ लोग पौलुस को मारने की साज़िश रचते हैं। चालीस से अधिक लोग यह क़सम खाते हैं कि जब तक पौलुस मर नहीं जाता, वे न खाएँगे न पिएँगे। लेकिन ख़ुदा उसे उसके एक भतीजे और एक रोमी सेनापति के ज़रिए बचाता है। वह उसको महफूज़ रखता है। 

क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया आपके ख़िलाफ़ है? मानो हर कोई आपके ख़िलाफ़ हो और मुश्किलें आपका पीछा ही नहीं छोड़तीं?

यीशु मसीह ने पौलुस से जो कहा था, वही आज आपसे भी कहता हैं: "हिम्मत रख!" वह आपके, जितना आप सोचते हैं, उससे भी ज़्यादा क़रीब हैं।

आप एक चमत्कार हैं।

Cameron Mendes
Author

Worship artist, singer-songwriter, dreamer and passionate about spreading the Gospel.