कोई भी शख़्स अकेले कलीसिया का निर्माण नहीं कर सकता।
कॅमरॉन और मैं अक्सर ऐसे जवानों से मिलते हैं, जिनका एक ही सपना होता है, फुल-टाइम मिनिस्ट्री करना। यह एक बहुत ही अच्छी ख़्वाहिश है, जो उनके ईमान और ख़ुदा के राज्य को आगे बढ़ाने के जोश को दिखाती है। लेकिन हम आमतौर पर उन्हें सिर्फ़ इसी रास्ते को चुनने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते।
बहुत-से लोग मानते हैं कि ख़ुदा की सेवा करने का सबसे बेहतरीन, या शायद एक ही तरीका, फुल-टाइम मिनिस्ट्री है। लेकिन यह सच नहीं है। महान प्रेरित पौलुस भी तंबू बनाने का काम करता था।
कुरुन्थियुस में पौलुस की मुलाक़ात अक्विला और प्रिस्किल्ला से होती है। वे दोनों एक ही पेशे से जुड़े थे और वे तंबू बनाने का काम मिलकर करते थे। पौलुस की सेवकाई उसके रोज़ाना ज़िंदगी से अलग नहीं थी। दोनों का काम और मिशन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था। (प्रेरितों के काम १८)
आराधनालय में विरोध बढ़ता गया, लेकिन नए मसीहीयों की संख्या भी बढ़ती गई। यहाँ तक कि आराधनालय का एक अगुवा, क्रिस्पुस, भी मसीही ईमान में आ गया था। तब ख़ुदा ने एक दर्शन में पौलुस को प्रोत्साहित किया: *“डर मत ... क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ।” (प्रेरितों के काम १८:९-१० HINOVBSI)
यह वादा बहुत अहम है। ख़ुदा की मौजूदगी ही सब्र की बुनियाद है।
बाद में हम देखते हैं कि अक्विला और प्रिस्किल्ला, अपुल्लोस को सिखातें हैं। वह बड़े जोश के साथ बोलता था, लेकिन अभी तक सुसमाचार को पूरी तरह नहीं समझता था। उसे सबके सामने सुधारने के बजाय, वे उसे वहाँ से अलग जगह ले गए और उन्होंने उसे ख़ुदा के मार्ग को बेहतर तरीक़े से समझाया।
प्रेरितों के काम अध्याय १८ हमें यह सिखाता है कि ख़ुदा का राज्य साथ में काम करने से आगे बढ़ता है। प्रेरित, व्यवसायी, शिक्षक और नए मसीही, हर किसी की एक अहम भूमिका है।
कोई भी शख़्स अकेले कलीसिया का निर्माण नहीं कर सकता।
शायद हम पूरे कार्य में अपनी भूमिका को कम समझतें होंगे। लेकिन ख़ुदा का काम उन लोगों के ज़रिए बढ़ता है जो वफ़ादारी के साथ मिलकर काम करते हैं, एक-दूसरे की कमियों को पूरा करते हैं और एक-दूसरे को बेहतर बनने में मदद करते हैं।
क्या आपका काम आपको उत्साहित करता है? या फ़िर आपकी नौकरी आपको सिर्फ़ पैसे कमाने का एक ज़रिया लगती है?
अगर हाँ, तो आप यह दुआ कर सकतें हैं:
“ऐ आसमानी पिता, मेरी मदद कर कि मैं दृढ़ रहूँ और ईमान में बना रहूँ, भले ही मिशन का कार्य अनदेखा और साधारण सा लगने लगे। मुझे हर दिन में तेरी पुकार को पहचानने में मदद कर। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।”