बंद दरवाज़े असफ़लता की निशानी नहीं, बल्कि वे दिशा-संकेत होते हैं।
मेरी ज़िंदगी ने कई अजीब मोड़ लिए हैं। जब मैंने क़ानून की पढ़ाई पूरी की, तो सोचा था कि वकील बनूँगी। लेकिन इसके बजाय मैं भारत आ गई। फ़िर मेरी शादी कॅमरॉन से हुई और मैंने येशुआ मिनिस्ट्रीज़ में बॅण्ड मॅनेजर के रूप में सेवा की। बाद में मैं माँ बनी और अब एक लेखिका हूँ। 🤷🏼♀️
एक और शख़्स था, जो ज़िंदगी के ऐसे अजीब मोड़ों से अच्छी तरह वाक़िफ़ था: वह है पौलुस।
प्रेरितों के काम अध्याय १६ में हम पढ़ते हैं, पौलुस अपनी दूसरे मिशनरी सफ़र पर निकलता है और तीमुथियुस उसके साथ जुड़ जाता है। वह जवान है, लेकिन समर्पित है। वे दोनों उन नगरों में जाते हैं जहाँ पहले से कलीसियाएँ स्थापित की जा चुकी थीं। उनके लिए यह ख़ुदा के काम का मुनासिब विस्तार था।
लेकिन फ़िर एक हैरान कर देनेवाली बात होती है। पवित्र आत्मा उन्हें कुछ क्षेत्रों में जाकर कलाम सुनाने से रोक देता है। दो बार उनकी योजनाएँ रुक जाती हैं। कोई वजह नहीं बताई जाती, कोई खुलासा नहीं दिया जाता। बस पैग़ाम इतना है: “यहाँ नहीं।”
फिर एक रात पौलुस को एक दर्शन मिलता है। मकिदुनिया का एक शख़्स ज़ोर से कहता है: *“मकिदुनिया में आकर हमारी मदद करो।” (प्रेरितों के काम १६:९) यहीं से रास्ता साफ़ हो जाता है। जो दरवाज़ा पहले बंद नज़र आ रहा था, वही आगे चलकर यूरोप की ओर खुलने वाला रास्ता बनता है। लेकिन उससे पहले उन्हें फिलिप्पी जाना था।
फिलिप्पी में उनकी मुलाक़ात लुदिया से होती है, जो एक व्यापार करने वाली स्त्री थी। फ़िर पौलुस एक लड़की को जो दासी थी, उसे दुष्ट आत्मा से आज़ाद करता है। इसी वजह से पौलुस और सीलास को जेल में डाल दिया जाता है। लेकिन जेल में भी, आधी रात के समय, वे ख़ुदा की इबादत करतें हैं। फ़िर एक भूकंप आता है, जेल के दरवाज़े खुल जाते हैं और जेलर यह सब देखकर पौलुस के द्वारा मसीही ईमान में आता है।
एक ही अध्याय। तीन बिल्कुल अलग-अलग लोग। एक ही सुसमाचार।
ख़ुदा की अगुवाई कई बार सीधे रास्तों से नहीं, बल्कि घुमावदार रास्तों के ज़रिए आती है। बंद दरवाज़े असफ़लता की निशानी नहीं होते, बल्कि वे दिशा-संकेत होते हैं।
शायद आप भी समझ नहीं पातें की कुछ बातें आगे क्यों नहीं बढ़ रही हैं या ये रुकावटें क्यों आ रही हैं। लेकिन यह याद रखें: ख़ुदा सिर्फ़ “हाँ” में ही नहीं, बल्कि “नहीं” में भी काम कर रहा होता है।
पीछे मुड़कर देखने पर, क्या आपकी ज़िंदगी में ऐसे मौके दिखाई देते हैं जहाँ एक बंद दरवाज़ा आख़िरकार आपको किसी बेहतर चीज़ की तरफ़ ले गया?