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Publication date 10 अग. 2026

फ़ज़्ल में शर्तें जोड़ना, मसीह की आज़ादी खोना है।

Publication date 10 अग. 2026

जब तक मैंने फ़ज़्ल का सही मतलब नहीं समझा, तब तक मैं सुसमाचार की गहराई को भी नहीं समझ पाई थी। सिंगापुर के पास्टर जोसेफ प्रिंस की शिक्षाओं ने मुझे यह समझने में मदद की कि ख़ुदा का फ़ज़्ल कभी ख़त्म नहीं होता और अब हमें उसूलों के अधीन नहीं, बल्कि फ़ज़्ल के अधीन होकर जीना है। 

प्रेरितों के काम अध्याय १५ में हम पढ़ते हैं, अन्यजातियों में बढ़ती हुई मसीहीयों की संख्या प्रेरितों के काम की क़िताब में एक अहम सवाल खड़ा करती है: क्या गैर-यहूदी विश्वासियों को यहूदी व्यवस्था का पालन करना चाहिए, जिसमें ख़तना भी शामिल है? 

इस विषय पर गहरी बहस होती है। क्या उद्धार सिर्फ़ फ़ज़्ल से मिलता है, या फ़ज़्ल के साथ धार्मिक क़ानूनों का पालन भी ज़रूरी है? 

यरूशलेम में प्रेरित और बुज़ुर्ग इकट्ठा होते हैं। पतरस उन्हें याद दिलाता है कि ख़ुदा ने अन्यजातियों को भी बिना किसी भेदभाव के पवित्र आत्मा दिया। *“तुम क्यों ख़ुदा की परीक्षा लेते हो और उन लोगों के गले में ऐसा जूआ रखना चाहते हो, जिसे न हम और न हमारे पूर्वज उठा सके?” (प्रेरितों के काम १५:१०) याक़ूब भी पक्का करता है कि यह बात नबियों की शिक्षाओं के अनुसार है।

नतीजा साफ़ दिखता है: उद्धार यीशु मसीह के फ़ज़्ल से मिलता है, बिना किसी इज़ाफ़ी शर्त के। एकता बनाए रखने के लिए कुछ व्यावहारिक निर्देश दिए गए, लेकिन आधार फ़ज़्ल ही रहा। 

प्रेरितों के काम अध्याय १५ सुसमाचार की बुनियादी सिख की हिफ़ाज़त करता है। जैसे ही हम ख़ुदा की नज़र में क़बूल किए जाने के लिए फ़ज़्ल के साथ अपनी शर्तें जोड़ने लगते हैं, हम मसीह में मिली आज़ादी को खो बैठते हैं। 

आज भी हम अनजाने में अपने लिए और दूसरों के लिए नए “क़ानून” बना लेते हैं, सांस्कृतिक उम्मीदें, अनकहे उसूल और धार्मिक रीतिरिवाज़। सवाल यह है: क्या हम आज भी वाक़ई फ़ज़्ल के सहारे ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं? 

किन क्षेत्रों में कानूनपरस्ती मसीह में मिलने वाली आपकी ख़ुशी को कमज़ोर कर सकती है? 

ख़ुद से इन सवालों को पूछें:

  • क्या आप सुसमाचार के असली संदेश और इंसानी रिवाज़ों के बीच फ़र्क़ कर सकते हैं?
  • क्या आपको यक़ीन है कि ख़ुदा का फ़ज़्ल ही आपके लिए काफ़ी है, या फ़िर सोचते हैं कि उसकी मंज़ूरी पाने के लिए नेक काम करने की ज़रूरत है?

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.