• HI
    • AR Arabic
    • CS Czech
    • DE German
    • EN English
    • ES Spanish
    • FA Farsi
    • FR French
    • HI Hindi
    • HI English (India)
    • HU Hungarian
    • HY Armenian
    • ID Bahasa
    • IT Italian
    • JA Japanese
    • KO Korean
    • MG Malagasy
    • MM Burmese
    • NL Dutch
    • NL Flemish
    • NO Norwegian
    • PT Portuguese
    • RO Romanian
    • RU Russian
    • SV Swedish
    • TA Tamil
    • TH Thai
    • TL Tagalog
    • TL Taglish
    • TR Turkish
    • UK Ukrainian
    • UR Urdu
Publication date 31 जुल. 2026

क्या आप ख़ुदा की पाक़ीज़गी पर चलने में संघर्ष करते हैं?

Publication date 31 जुल. 2026

क्या आप कभी दूसरों के सामने ख़ुद को बेहतर दिखाने की कोशिश करते हैं? मैं तो ज़रूर करती हूँ। क्या हम सब ऐसा नहीं करते? मेरा मानना है कि यह इंसानी फ़ितरत है कि हम इस बात की फ़िक्र करें कि लोग हमें कैसे देखते हैं। लेकिन कुछ लोग इस हद तक पहुँचते है कि वे दूसरों से और यहाँ तक कि ख़ुदा से भी झूठ बोलने लगते हैं। 

इसका उदहारण हम प्रेरितों के काम अध्याय ५ में देखते हैं। अननियास और सफ़ीरा ने अपनी एक ज़मीन बेची और ऐसा दिखावा किया मानो उन्होंने उसकी पूरी रकम कलीसिया को समर्पित कर दी हो, जबकि वास्तव में उन्होंने उसका एक हिस्सा अपने लिए अलग रख लिया था।

असल में मसला यह था कि उन्होंने झूठ बोला था। वे लोगों की नज़रों में अपने आपको उससे अधिक आत्मिक और समर्पित दिखाना चाहते थे, जितने वे वास्तव में थे। तब पतरस ने उनसे गंभीरता से कहा: 

*“तुमने मनुष्यों से नहीं, बल्कि ख़ुदा से झूठ बोला है।” (प्रेरितों के काम ५:४)

 इसके बाद जो होता है, वह ज़्यादा संजीदा बात है: दोनों वहीं गिरकर मर जाते हैं और यह देखकर सब लोग डर जाते है। इससे कुछ गंभीर सवाल पैदा होते है। यहाँ, ख़ुदा का इंसाफ़ इतना सीधा और साफ़ क्यों नज़र आता है? उन्हें इतनी सख़्त सज़ा क्यों मिलती है? 

हमें यह समझना चाहिए कि उस समय कलीसिया बिल्कुल नई थी और उसकी बुनियाद रखी जा रही थी। ख़ुदा साफ़ तौर पर दिखाता है कि उसकी पाकीज़गी पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कलीसिया, धार्मिक दिखावे की जगह नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह है जहाँ सच्चाई को अहमियत दी जाती है।  

यह कहानी दिखाती है कि फ़ज़्ल कोई आम बात नहीं है। वही आत्मा जो ताक़त देता है, पाक़ भी है। ख़ुदा अपनी कलीसिया महज़ उत्साह पर नहीं, बल्कि सच्चाई और ईमानदारी पर तैयार करता हैं। 

इसके बावजूद, इस अध्याय में हम पढ़ते हैं कि चिन्ह और चमत्कार तेज़ी बढ़ते है और कई लोग कलीसिया में दाख़िल भी होते हैं। पवित्र आत्मा का उंडेलना और बेदारी, साथ-साथ चलती हैं। 

शायद यह हमें एक असहज सवाल के सामने खड़ा करता है: क्या हम ख़ुदा की ताक़त को, पाकीज़गी के बिना हासिल करना चाहते हैं? 

ख़ुदा कामिल लोगों को नहीं, ईमानदार दिलों को चाहता है। 

क्या आपकी ज़िंदगी में ऐसे हिस्से हैं, जहाँ आप ख़ुद को जितने हैं उससे ज़्यादा आत्मिक दिखने की क़ोशिश करते हैं? पवित्र आत्मा से पूछे कि वह उन बातों को आपके सामने लाए और उन्हें ख़ुदा को समर्पित करें।

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.