क्या आप पवित्र आत्मा से भरपूर हैं?
क्या आप पवित्र आत्मा से भरपूर हैं? इस बारे में आप क्या सोचते है? क्या उसके बाद आपने अपनी ज़िंदगी में कोई बदलाव महसूस किया है?
प्रेरितों के काम के पहले अध्याय में जिस प्रतिज्ञा का इंतज़ार था, वह दूसरे अध्याय में पूरा होता है।
जो एक ऊपर के कमरे में दुआ कर रहे विश्वासियों के छोटे-से समूह के साथ शुरू हुआ, वह जल्द ही एक ऐसी रूहानी बेदारी में बदल गया और इतिहास की दिशा बदल गई: पवित्र आत्मा का भरपूरी से उंडेला जाना।
पेंटेकॉस्ट के यहूदी पर्व के दौरान, अचानक बहती हुई आँधी-सी गूँज सुनाई देती है। आग की-सी जीभें दिखाई देती हैं, और साधारण लोग उन भाषाओं में बोलने लगते हैं जिन्हें उन्होंने कभी सीखा नहीं था, ऐसे शब्द जो पवित्र आत्मा की सामर्थ और प्रेरणा से निकल रहे थे।
यह देखकर, बाहर मौजूद अलग-अलग देशों से आए लोग यह सुनकर उलझन में पड़ जाते हैं। तब पतरस, बड़ी हिम्मत के साथ यह एलान करता है: यीशु ही प्रभु और मसीहा हैं।
यह सुसमाचार सुनकर कई लोगों के दिल गहराई से छू जाते हैं और पतरस उन्हें पश्चाताप, बपतिस्मा और नई ज़िंदगी हासिल करने के लिए न्योता देता है। उसी दिन लगभग ३,००० लोगों ने यीशु मसीह का अनुसरण करने का फ़ैसला किया।
मसीहियों का यह नया समुदाय एक बड़े परिवार की तरह साथ रहने लगा। वे अपनी ज़िंदगी, अपनी दौलत और अपना वक़्त एक-दूसरे के साथ बाँटने लगे और आदर, ख़ुशी और सादगी उनके हर दिन की पहचान बन गई।
प्रेरितों के काम की क़िताब के दूसरे अध्याय से यह सिखने मिलता है कि जब ख़ुदा अपनी रूह उंडेलता है, तब परिवर्तन तय है। यीशु मसीह हमारी ज़िंदगी का मरकज़ बन जाता हैं और ऐसा समुह बनता है जो उसकी मोहब्बत को दुनिया के सामने ज़ाहिर करता है।
क्या आप पवित्र आत्मा के लिए खुले मन हैं? क्या आप ख़ुदा को यह इजाज़त देंगे कि वह आपको बदले, महज़ अंदर से ही नहीं, बल्कि इस बात में भी कि आप दूसरों के साथ कैसे जीते हैं?
आओ मिलकर दुआ करें:
पवित्र आत्मा, मेरे दिल को भर दें और मेरी मदद कर कि मैं यीशु मसीह को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाऊँ। मुझे और हमारें समाज को ऐसा बदल दे कि हम तेरी गवाही बन जाएँ। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।