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Publication date 27 जुल. 2026

क्या ख़ुदा के वक़्त का इंतज़ार करना मुश्किल सा है?

Publication date 27 जुल. 2026

हम ऐसा कुछ करने जा रहे हैं जो हमने ‘चमत्कार हर दिन’ पर अब तक नहीं किया हैं।😃

अगले २८ दिनों तक हम बाइबल की एक पूरी क़िताब पढ़ेंगे, हर दिन एक अध्याय। क्या आप तैयार हैं? 

और वह क़िताब हैं प्रेरितों के काम

प्रेरितों के काम की क़िताब का पहला अध्याय एक नई शुरुआत का एहसास कराता है। 

पहली आयत में लूका लिखता हैं कि उसकी पिछली क़िताब उन सब बातों के बारे में थी जो यीशु मसीह ने करना और सिखाना शुरू किया था। मूल भाषा में “शुरू किया” शब्द बहुत अहम है, क्योंकि यीशु मसीह का काम अभी ख़त्म नहीं हुआ था। 

पुनरुत्थान के बाद और स्वर्गारोहण से ठीक पहले भी, वह लगातार सिखाता रहा।

चालीस दिनों तक यीशु मसीह अपने चेलों से ख़ुदा के राज्य के बारे में बात करता रहा। लेकिन चेलें अब भी उसे एक दुनियावी और राजनीतिक राज्य समझ रहे थे। वे पूछते हैं, “हे प्रभु, क्या आप इसी समय इस्राइल का राज्य फ़िर से स्थापित करेंगे?” (आयत ६)। यीशु मसीह उनकी नज़र को किसी और अज़ीम बात की ओर मोड़ता है। 

ख़ुदा का राज्य तो आएगा, लेकिन वैसा नहीं जैसा वे उम्मीद कर रहे थे। और उसमें ख़ुद यीशु मसीह नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा की क़ुव्वत के ज़रिए उसके चेलें अहम ज़िम्मेदारी निभाएँगे। 

यीशु मसीह उनसे वादा करता है कि वे सब पवित्र आत्मा की सामर्थ पाएँगे और उसके गवाह बन जाएँगे (आयत ८)। जब वह उन्हें इंतज़ार करने के लिए कहता है, तब वे उम्मीद के साथ दुआ करने लगते हैं।

अक़्सर हम इसके विपरीत करते हैं। हम अपने हिसाब से योजनाएँ बनाते हैं और फ़िर ख़ुदा से उन्हें बरक़त देने के लिए कहते हैं। लेकिन ख़ुदा का काम, निर्भरता से शुरू होता है। 

कलीसिया जोश से नहीं, बल्कि फ़रमाबरदारी से जन्म लेती है, हुनर से नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा के भरें जाने से और इंसानी ख़्वाहिश से नहीं, बल्कि दैवी सामर्थ से।

गवाही देना बोलने से नहीं, बल्कि पाने से शुरू होती है। यीशु मसीह हमें पहले उसकी हुज़ूरी में ख़ामोश रहने और ख़ुद को उसकी आत्मा से भरने के लिए न्योता देता हैं और उसी निर्भरता के ज़रिए, सच्चा फल उत्पन्न होता है।

इसके लिए एक बेहतरीन तरीका है तन्हाई और ख़ामोशी का अभ्यास करना। अगर आप नहीं जानते कि कैसे शुरू करें, तो मैंने एक बहुत ही ख़ास बाइबल पढ़ने की योजना लिखी है, जिसे पढ़ने से आपको शुरु करने में मदद मिलेगी। 

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.