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Publication date 25 जुल. 2026

क्या आप भी बदलाव ला सकते हैं?

Publication date 25 जुल. 2026

मैंने देखा है कि जब हम ख़ुदा से कुछ माँगते हैं, तो उसका एक पसंदीदा जवाब अक्सर यही होता है "पहले तू कर!" 

सालों पहले मुझे भी ख़ुदा से यही जवाब मिला था। मैं उससे अच्छी हिंदी उपासना के गीतों की कमी को लेकर शिकायत कर रहा था। तभी मैंने उसकी आवाज़ सुनी, “तो फ़िर तू ही इसके बारे में कुछ क्यों नहीं करता?” 

मेरा पहला ख़याल यही था, “यह तो नामुमक़िन है!” उस वक़्त मैं सिर्फ़ एक संगीतकार था, कोई उपासना अगुवाई करने वाला नहीं और हिंदी तो मेरी पहली भाषा भी नहीं थी। लेकिन मैंने आज्ञा मानी और उसी से 'येशुआ मिनिस्ट्रीज' की शुरुआत हुई।

यीशु मसीह के चेले भी कुछ ऐसी ही हालत से गुज़रे, जब वे एक मुश्किल को लेकर उसके पास आए। यीशु मसीह काफ़ी देर से एक बड़ी भीड़ को शिक्षा दे रहा था, लेकिन अब सूरज ढलने लगा था और चेले फिक्रमंद हो गए थें: 

*“उन्होंने कहा, ‘यह जगह सुनसान है, और बहुत देर हो चुकी है। लोगों को जाने दें, ताकि वे आस-पास के इलाक़े और गाँवों में जाकर अपने लिए कुछ खाने को ख़रीद सकें। “उन्हें कुछ खाने के लिए दो।” मरकुस ६:३५-३७ HINOVBSI

उनकी आँखों में हैरानी और उलझन साफ़ दिखाई दे रही थी। उनके हाथ में बस पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ थीं। चेलों की नज़र में, जो कुछ उनके पास था, वह बेहद मामूली, कम और लगभग बेकार था। लेकिन यीशु मसीह ने उनसे वही थोड़ी सी चीज़ अपने पास लाने को कहा।

इसलिए उन्होंने वही थोड़ी-सी चीज़ उसके सामने रख दी, जो उन्हें छोटी और नाकाफ़ी लग रही थी। फ़िर यीशु मसीह ने उन पाँच रोटियों और दो मछलियों को अपने हाथों में लिया, आसमान की ओर देखा, शुक्र अदा किया, और रोटी तोड़कर अपने चेलों को देने लगा। टुकड़ा-दर-टुकड़ा, वह उन्हें उनके हाथों में देता गया। 

एक चमत्कार हुआ। यीशु मसीह की मदद से चेलों ने ५००० से भी ज़्यादा लोगों की भीड़ को खाना खिलाया।

जब मैंने येशुआ मिनिस्ट्रीज़ शुरू की, तो मैंने ख़ुदा को वही थोड़ा-सा दिया जो मेरे पास था, स्थानीय कलीसिया के लिए मेरा जुनून, मेरी संगीत की प्रतिभा और उसकी सेवा करने की इच्छा। ख़ुदा ने उसे बढ़ाकर एक अंतरराष्ट्रीय संगीत सेवा बना दिया।

आपने हाल ही में कौन से सवाल, मुश्किलें या अर्ज़िया ख़ुदा के सामने रखी हैं? क्या आपको लगता है कि शायद उसका जवाब यही हो “तुम ही कुछ करो!”? आपके पास कौन-सी पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ हैं, जिन्हें आप उसके सामने रख सकते हैं?

यह लेख 'चमत्कार का सफ़र' ई-बुक से लिया गया है। अगर आप इस कहानी पर और गहराई से मनन करना चाहते हैं, तो इस ई-बुक को मुफ़्त में डाउनलोड करें इसमें इस चमत्कार से हमारी ज़िंदगी में मिलने वाले कई सबक़ हैं और साथ ही सोचने-समझने के लिए दिलचस्प सवाल दिए गए हैं। मैं आपको इसे ज़रूर पढ़ने की सलाह देना चाहता हूँ! 

आप एक चमत्कार हैं।

Cameron Mendes
Author

Worship artist, singer-songwriter, dreamer and passionate about spreading the Gospel.