क्या आप इस वक़्त यीशु मसीह के क़रीब महसूस करते हैं?
क्या आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जिसके आप बहुत क़रीब हैं? मेरा मतलब, दिल से क़रीब। मैं आपके जीवनसाथी की बात नहीं कर रहा हूँ। मेरी ज़िंदगी में ऐसे कुछ लोग हैं। पिछले १०-२० सालों के दौरान, मैं अपने वर्शिप टीम के कुछ सदस्यों के बहुत क़रीब हो गया हूँ। हमने साथ में बहुत कुछ देखा है, दुनिया भर की यात्राएँ की हैं, खुशियों और मुश्किलों के पल बाँटे हैं। मैं अपने आपको ख़ुशनसीब समझता हूँ कि मुझे यह ज़िंदगी ऐसे लोगों के संग गुज़ारने का ख़ास मौक़ा मिला है।
यह बात मुझे सोचने पर मजबूर करती है कि क्या यीशु मसीह का भी ऐसा कोई दोस्त था? अगर था, तो यीशु मसीह ने इसे सीधे तौर पर कभी नहीं कहा या ज़ाहिर किया। लेकिन किसी और ने एक तरह से यह ज़रूर कहा और वह था, यूहन्ना। यहाँ मैं यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की बात नहीं कर रहा हूँ, बल्कि यीशु मसीह के चेले, यूहन्ना की बात कर रहा हूँ। उसने अपने लफ़्ज़ों में कहा “वह चेला जिससे यीशु मसीह मोहब्बत करता हैं।” (यूहन्ना १३:२३)
अपने बारे में ऐसा कहना काफ़ी बड़ी बात है, है ना? फ़िर भी, कम से कम यूहन्ना को यक़ीन था कि यीशु मसीह उसे इसी नज़र से देखता था। शायद वह यीशु मसीह का सबसे क़रीबी दोस्त था। या शायद, यीशु मसीह के सभी दोस्तों में से वही था जिसने उसकी मोहब्बत को सबसे गहराई से समझा था। द चोज़न में हम देख सकते हैं कि उसका रिश्ता कैसे बढ़ता है और धीरे-धीरे यूहन्ना को बदल देता है।
यीशु मसीह की मोहब्बत को हम सिर्फ़ हासिल नहीं करते हैं, बल्कि वह हमारी पूरी पहचान को आकार भी देती हैं।
ऐसा ही यूहन्ना के साथ होता हुआ नज़र आता है। अगर उसे अपने बारे में कुछ कहना हो, अगर उसे किसी बात पर भरोसा करना हो, तो वह यही कहता है कि, यीशु मसीह मुझसे मोहब्बत करता हैं। क़रीब रहना यूहन्ना की सबसे बड़ी ताक़त बन गई थी। यीशु मसीह के क़रीब आकर, उसकी मौजूदगी को महसूस करके और उसके क़रीब बने रहकर, वह सच में वही चेला बन गया जिससे यीशु मसीह बेशुमार मोहब्बत करता था।
क्या क़रीब रहना भी आपकी मोहब्बत की ज़ुबान है? शायद आप भी थोड़े यूहन्ना जैसे हैं।
यीशु मसीह के क़रीब आओ और उसकी मोहब्बत आपको पूरी रीती से बदल दें।