क्या बे-यक़ीनी हालात में उम्मीद थामे रखना आपके लिए मुश्किल हो जाता है?
मैंने ए.आई से पूछा कि वह मुझे संक्षेप में एक आदर्श माँ के बारे में बताए। उसका जवाब यह था: “एक आदर्श माँ तसल्ली, हिम्मत और बेपनाह मोहब्बत का ख़ूबसूरत संगम होती है। वह आपके सबसे अँधेरे पलों में भी आपके भीतर छिपी रोशनी को देखती है, आपके बेहतरीन रूप पर तब भी यक़ीन रखती है जब आप ख़ुद पर शक़ करने लगते हैं। वह ख़ामोशी से अनगिनत अनदेखे बोझ उठाती है, हर दर्द को मुस्कुराकर सह लेती है, और किसी तरह ज़िंदगी के साधारण लम्हों को भी बेहद ख़ास और यादगार बना देती है।”
एक बात साफ़ है: मरियम, यीशु मसीह की माँ, इसका बेहतरीन मिसाल थीं। वह सबसे अलग और जुदा थी। वह एक चमकती हुई मिसाल थी।
- वह हमेशा अपने बेटे का हौसला बढ़ाती थीं (यूहन्ना २:५)।
- वह लगातार उसके साथ खड़ी रहीं (यूहन्ना १९:२५-२७ HINOVBSI)।
- वह हमेशा सलाह देने या मोहब्बत और देखभाल करने के लिए मौजूद रहीं (लूका २:४८-५१ HINOVBSI)।
- और वह कभी नहीं भूलीं कि फ़रिश्ते ने उसके बेटे के बारे में क्या बताया था (लूका १:२६-३८ HINOVBSI)।
मुझे यह बात बहुत पसंद है कि कैसे मरियम ने यीशु मसीह को उसका पहला चमत्कार करने के लिए आगे बढ़ाया, जब उसने पानी को दाखरस में बदल दिया। और एक सच्ची माँ की तरह, उसने “ना” को आख़री जवाब नहीं माना। द चोज़न ने इसे बड़ी ख़ूबसूरती से दर्शाया है।
शायद आप भी एक माँ हैं। शायद आप अपने अंदर ये “माँ जैसी” ख़ूबियाँ देखते हैं या शायद आप इन दोनों एहसासों के बीच कहीं हैं। हो सकता है कि आप मरियम में अपनी झलक देखते हैं, जो ख़ामोश रहकर दूसरों को सहारा देती है, जो लोगों पर उस से पहले यक़ीन रखती हैं, जब उन्हें ख़ुद पर यक़ीन न हो या जो उम्मीद को थामे रखती है, चाहे ज़िंदगी कितनी भी ग़ैर-यक़ीनी क्यों न लगे।
अगर यह आपको जाना-पहचाना सा लगता है, तो हो सकता है कि आप भी यीशु मसीह की माँ, मरियम की तरह हैं।
आज आप किसके लिए एक माँ जैसी भूमिका निभा सकते हैं, उसे मोहब्बत देकर, उस पर भरोसा जताकर, या उसका हौसला बढ़ाकर?