क्या आपको कभी अपने ईमान में शक़ से जूझना पड़ता है?
बचपन में मेरा एक दोस्त था, जो बड़े ही अलग मिज़ाज का था। वह शरारत करने में हमेशा सबसे आगे रहता था, और उसकी पहचान थी अपने डोले-शोलें दिखाते हुए पोज़ देना। कोई ताज्जुब की बात नहीं कि उसका नाम ही “हतोड़ा” पड़ गया। सच तो यह है कि आज भी हम उसे इसी नाम से बुलाते हैं, जबकि अब वह ख़ामोश हो चुका है, शादीशुदा है और ख़ुद एक पिता भी बन चुका है। लेकिन कभी-कभी कोई उपनाम बस हमेशा के लिए साथ रह जाता है।
थोमा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब भी उसका ज़िक्र होता है, यहाँ तक कि बाइबल में भी, लोग उसके शक़ करने वाली फ़ितरत की ओर इशारा करते हैं (यूहन्ना २०:२४)। सच कहें तो उसका नाम एक कहावत जैसा बन गया है: “शक़्क़ी थोमा।” फ़िर भी, उसने यीशु मसीह का अनुसरण किया। और आख़िरकार, वह हम में से कई लोगों से कम शक़्क़ी निकला।
उसकी शक़ करने वाली फ़ितरत से हम काफ़ी जुड़ा हुआ महसूस करते है। हम हर बात को फ़ौरन सच नहीं मान लेते हैं। हम दावों को परखते हैं और लगभग हर चीज़ पर सवाल उठाते हैं।
लेकिन थोमा का शक़, हिचकिचाहट या फ़ैसला न कर पाने जैसा नहीं था और न ही निराशावादी सोच से भरा था। दरअसल वह कुछ नया खोजना चाहता था। द चोज़न सीरीज़ में, हम यह बार-बार देखते हैं कि कैसे थोमा धीरे-धीरे यीशु मसीह के क़रीब आगे बढ़ता हैं।
क्या आप भी अपने आपको थोमा से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं? कोई ऐसा, जो गहरे सवाल पूछने की हिम्मत रखता है, फ़िर भी हैरान होने या अपनी सोच सुधारे जाने के लिए खुला रहता है? कोई ऐसा, जो शक़ से जूझने को तैयार है, लेकिन दूर जाने को नहीं?
आपके शक़ को यीशु मसीह के पास लेकर आओ और आपके शक़ से नाराज़ नहीं होगा बल्कि वह आपको उसके और क़रीब लाएगा।