क्या आपकी ग़लतियाँ आपको यह महसूस कराती हैं कि आप क़ाबिल नहीं हैं?
जहाँ तक चेलों की बात है, मैं थोमा से ज़्यादा, शमौन पतरस जैसा होना पसंद करूँगा (उसके बारे में हम बाद में और साझा करेंगे)। थोमा को शक़्क़ी इंसान के रूप में जाना जाता है, हालाँकि कई बार अच्छे मायने में। ऐसे लोग अक़्सर मशहूर फ़िलोसोफ़र, डेकार्ट के नज़रिए को अपनाते हैं: ‘मैं शक़ करता हूँ, इसलिए मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ।” इसमें कुछ ग़लत नहीं है।
पर मैं शमौन पतरस की ज़िंदगी देखने के नज़रिए से ज़्यादा जुड़ता हूँ। आप जानते हैं: “मैं सोचने से पहले क़दम उठा लेता हूँ, और इसी वजह से अक़्सर मुसीबत में भी पड़ जाता हूँ।” मैं पूरी सावधानी के साथ सही होने से ज़्यादा, पूरे जोश और जज़्बे के साथ ग़लत होना पसंद करूँगा। मैं, हिचकिचाहट की धुंध में धीरे-धीरे ऊपर उठने से बेहतर, पूरे जुनून के साथ गिरना पसंद करूँगा।
लेकिन क्या यह सिर्फ़ मेरी और शमौन पतरस की ही बात है या आपकी भी?
शमौन पतरस हर तरह से ख़ुलकर बोलने के लिए मशहूर था। उसके पास यह चौकाने वाली पहचान भी थी कि उसने यीशु मसीह को मसीहा के रूप में पहचाना और इसके लिए यीशु मसीह ने उसकी तारीफ़ की, लेकिन कुछ ही लम्हों बाद वह पूरी तरह बात को समझने में चूक गया। आप यह सब मत्ती १६:१५-२३ HINOVBSI में पढ़ सकते हैं।
फ़िर भी, जैसा कि द चोज़न सीरीज़ में बहुत ख़ूबसूरती से दिखाया गया है, शमौन पतरस सिर्फ़ ठोकरें खाता रहा और जल्दबाज़ी में ग़लत बातें कहता रहा, ऐसा नहीं था। यीशु मसीह ने उसे बदल दिया। एक गुस्सैल इंसान से मजबूत चट्टान बनाया। उसे एक जल्दबाज़ मछुआरे से शुरुआती कलीसिया का अगुआ बनाया।
क्या आप शमौन पतरस की कुछ झलकियाँ अपने अंदर भी देखते हैं? क्या आप भी ऐसे हैं जो हिम्मत और जोश के साथ आगे बढ़ते हैं और कभी-कभी मुँह के बल गिर पड़ते हैं, लेकिन दोबारा उठकर खड़े होते हैं? क्या आप भी अपनी ग़लतियों को मान लेते हैं और उसके बावजूद, यीशु मसीह के पीछे चलते रहते हैं?
चाहें आप कितनी भी ग़लतीयाँ करते हों, फ़िर भी यीशु मसीह आपको अपनी खुलीं बाँहों से अपनाना चाहता हैं!