क्या आपने कभी किसी बात के लिए दुआ की और महसूस किया कि ख़ुदा ने उसे सीधे आपकी झोली में डाल दिया हैं?
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपने किसी ऐसी चीज़ के लिए दुआ की हो जिसकी आपको बेहद ज़रूरत थी और वह सच-मुच आसमान से गिर पड़ी हो?
मेरे साथ तो ऐसा कभी नहीं हुआ, लेकिन मैं एक दिन इसे ज़रूर अनुभव करना चाहूँगी!
हालाँकि इस्राएलियों के साथ ऐसा हुआ था। जब वे रेगिस्तान में भूखे थे और खाने के लिए ख़ुदा से दुआ कर रहे थे, तब आसमान से मन्ना बरसने लगा (निर्गमन १६:२-५ HINOVBSI)।
“मन्ना” का अर्थ है “यह क्या है?” क्योंकि जब इस्राएलियों ने इसे देखा तो उन्होंने यही सवाल पूछा था। उन्होंने इससे पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा था। यह ऐसी रोटी थी जो धनिया के बीज जैसी दिखती थी, लेकिन उसका स्वाद शहद के केक जैसा मिठा था। 🧐 पूरे ४० साल तक, जब वे जंगल में भटकते रहे, तब वे इसी मन्ना पर ज़िंदा रहे।
इस चमत्कारी मन्ना की कहानी, पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती रही है और सदियों बाद, जब यीशु मसीह ने ५ रोटियों और २ मछलियों को बढ़ाकर ५,००० लोगों को खिलाया, तब लोगों को वही मन्ना की कहानी याद आई। (यूहन्ना ६)।
लोग एक-दूसरे से पूछने लगे, “यह कौन है?”
तब यीशु मसीह ने उन्हें समझाया:
*“मैं ज़िंदगी की रोटी हूँ। तुम्हारे पुरखों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए। लेकिन यहाँ वह रोटी है जो आसमान से उतरती है, जिसे जो कोई खाएगा वह नहीं मरेगा। मैं वह ज़िंदगी की रोटी हूँ जो आसमान से उतरी है। जो कोई इस रोटी को खाएगा, वह क़ायम ज़िंदा रहेगा। यह रोटी मेरा शरीर है, जिसे मैं दुनिया की ज़िंदगी के लिए दूँगा।” — यूहन्ना ६:४८-५१ HINOVBSI
रेगिस्तान का मन्ना असल में यीशु मसीह की ओर इशारा करता है। जिस तरह जंगल में ख़ुदा ने रोटी खिलाकर अपने लोगों को शारीरिक ज़िंदगी दी, उसी तरह यीशु मसीह, जो ज़िंदगी की रोटी हैं, हमें अब्दी ज़िंदगी देता हैं।
जिस तरह मन्ना से लोगों को जीने के लिए सारी ऊर्जा और पोषण मिला, उसी तरह ज़िंदगी को संभालने के लिए जो कुछ हमें चाहिए, वह सब हमें यीशु मसीह में मिलता है।।