क्या आप यक़ीन रखते हैं कि ख़ुदा आपकी नाइंसाफ़ी वाली तकलीफ़ को किसी बड़े मक़सद के लिए इस्तेमाल कर सकता है?
क्या आपकी ज़िंदगी में कभी ऐसा लम्हा आया है जब आप ठहरकर यह सोचने लगे, “मैं इस उलझन में कैसे फँस गया?” हौसला रखें, आप अकेले नहीं हैं! मैं समझ सकती हूँ की यूसुफ़ ने कैसा महसूस किया होगा। (इस कहानी को आप उत्पत्ति ३७ HINOVBSI से आगे पढ़ें)
जैसे-जैसे हम यूसुफ़ की ज़िंदगी के बारे में पढ़ते हैं, हमें उसकी तरफ़ से कोई बड़ी ग़लती नज़र नहीं आती। वो लगभग बेदाग लगता हैं, एक मेहनती इंसान, शानदार किरदार के साथ। बिना किसी क़सूर के उसे ग़ुलामी में बेच दिया गया और जब उसने पूरी ईमानदारी दिखाते हुए मालिक की बीवी से ख़ुदका बचाव किया, तब भी उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाकर क़ैदख़ाने में डाल दिया गया (उत्पत्ति ३९)।
हालाँकि यूसुफ़ बेग़ुनाह नहीं था, क्योंकि कोई इंसान मुक़म्मल नहीं होता, लेकिन उसकी लगभग बेदाग ज़िंदगी हमें एक और मासूम शख़्स की याद दिलाती है, जिसे दूसरों के ग़ुनाहों की वजह से सज़ा मिली: यीशु मसीह।
यीशु मसीह, वो अकेला इंसान हैं जिसने कभी ग़ुनाह नहीं किया, फ़िर भी उस पर झूठे इल्ज़ाम लगाए गए, नाइंसाफ़ी से क़ैद किया गया और बेग़ुनाह होते हुए उसे सज़ा-ए-मौत दी गई।
*“ख़ुदा ने उसे, जो ग़ुनाह से पाक था, हमारे लिए ग़ुनाह ठहराया, ताकि हम उसमें ख़ुदा की रास्तबाज़ी बन जाएँ।” (२ कुरिन्थियों ५:२१ HINOVBSI)
आख़िर में, यूसुफ़ को वो इज़्ज़त मिली जिसका वो हक़दार था और उसे पूरे मिस्र में सबसे ऊँचा पद दिया गया, फ़िरौन के बाद, दूसरा (उत्पत्ति ४१:३९–४० HINOVBSI)।
इसी तरह, यीशु मसीह को भी सबसे ऊँचा मक़ाम दिया गया, ख़ुदा के सिंहासन के दाहिने हाथ पर और तमाम फ़रिश्ते, इख़्तियार और क़ुव्वतें उसके आगे सर झुकाती हैं (१ पतरस ३:२१–२२ HINOVBSI)।
यूसुफ़ की कहानी पढ़ते हुए, मेरे दिल में अक्सर ये सवाल आता है, कि क्या यूसुफ़ को पता था कि उसकी ये नाइंसाफ़ी भरी और बेवजह लगने वाली तकलीफ़ें दरअसल एक बड़े मंसूबे के हिस्सा थे? एक ऐसी कहानी, जो गहराई और भविष्यवाणी से जुड़ी अंदाज़ में यीशु मसीह की तरफ़ इशारा करती थी।
यूसुफ़ की कहानी हमें ये याद दिलाती है कि हमारी तकलीफ़ें चाहे वे कितनी ही लंबी, सख़्त और नाइंसाफ़ क्यों न लगें, एक बड़ी तस्वीर के हिस्सा हैं, जिसे हम अभी नहीं देख सकते, मगर ख़ुदा ज़रूर देखता है।
जब आप यूसुफ़ की तरह, नम्रता से मुश्किलों को सहते हैं, तब आपकी ज़िंदगी एक ज़िंदा गवाही बन जाती है।