क्या आप तैयार हैं कि यीशु मसीह लौटकर आएँ और दुनिया से बुराई को मिटा दें?
बाइबल के कई क़िताबें कोई दिलचस्प और ज़बरदस्त दास्तान जैसी लगती हैं। एक नामुमक़िन और ख़ास मक़सद, रोमांच, अच्छे और बुरे लोग और एक ऐसी कहानी जो आपको अपनी ओर खींच लेती है। ऐसी ही क़िताबों में से नहेम्याह, एक क़िताब है।
नहेम्याह वो बहादुर हीरो हैं जिसे ख़ुदा की तरफ़ से यरूशलेम शहर की टूटी-फूटी दीवारों को दोबारा बनाने का ख़ास काम मिलता है। लगातार ख़तरे के बीच, कम संसाधन के बावजूद और दुश्मनों की चाल से बचते हुए, नहेम्याह और उसके लोगों ने सिर्फ़ ६ महीने में दीवारों को फ़िर से बना लिया!
नहेम्याह की कहानी और यीशु मसीह की ज़िंदगी के बीच कई समानताएँ हैं।
जब राजा के दरबार में काम करने वाले नहेम्याह ने सुना कि उसके लोग तकलीफ़ में थे, तब उसने उनकी मदद करने के लिए, अपने इज़्ज़त से भरे काम को और आराम की जगह को छोड़ दिया। इसी तरह, यीशु मसीह भी, इज़्ज़त और महिमा की जगह छोड़कर नीचे धरती पर आया ताकि इंसान को बचाया जा सकें।
जहाँ पहले के हुकूमत करने वालें ग़रीबों पर ज़ुल्म करते थे और उन पर ज़्यादा महसूल लगातें थे, वहीं नहेम्याह ने ग़रीबों की मदद की और उनका बोझ हल्का किया (नहेम्याह ५:१४–१६ HINOVBSI)। इसी तरह, यीशु मसीह हमें न्योता देता हैं:
“तुम सब जो थके हुए और बोझ से दबे हुए हैं, मेरे पास आओ और मैं तुम्हें विश्राम दूँगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो और मुझसे सीखों, क्योंकि मैं नरम दिल और फ़रमाबरदार हूँ और तुम अपनी रूह के लिए सुक़ून पाओगे। क्योंकि मेरा बोझ आसान और हल्का है।” (मत्ती ११:२८–३० HINOVBSI)
नहेम्याह की सेवाभावी अगुवाई में यीशु मसीह की झलक दिखती हैं, वो लोगों का बोझ हल्का करता हैं, उनके ज़ुल्म को दूर करता हैं और उन्हें आज़ादी देता हैं।
जब दीवार का काम पूरा हो जाता है, तो नहेम्याह १२ साल तक यरूशलेम में रहता हैं और एक इंसाफ़ पसंद और सच्चा अगुवाह के तौर पर काम करता हैं। फ़िर वो यरूशलेम को छोड़कर वापस राजा की सेवा में चला जाता हैं। लेकिन उसके बाद जब नहेम्याह दूसरी बार यरूशलेम लौटता हैं तब वो शहर से बुराई को जड़ से ख़त्म करने लौटता हैं। वो मंदिर को साफ़, कमरों को शुद्ध और ख़ुदा के घर को दोबारा पुनर्स्थापित करता हैं (नहेम्याह ५:१४-१६ HINOVBSI, नहेम्याह १३:६-९ HINOVBSI)।
यीशु मसीह भी दोबारा आने वाला हैं और जब वो आएगा, तो इस दुनिया से हर बुराई को मिटा देगा!
“वो तुम्हारी आँखों से हर आँसू पोंछ देगा। अब न मौत होगी, न मातम, न रोना, न दर्द क्योंकि पुरानी बातें ख़त्म हो चुकी होंगी।” (प्रकाशित वाक्य २१:४ HINOVBSI)
क्या यह एक बेहतरीन उम्मीद नहीं है?