यीशु मसीह आपकी पनाह हैं?
मेरे बारे में शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि पेशे से मैं एक आपराधिक वकील रही हूँ। मैंने उस पेशे को बहुत लंबे वक़्त तक नहीं निभाया, क्योंकि ख़ुदा ने मुझे सेवकाई के लिए बुला लिया था। फ़िर भी, आपराधिक मामलों में मेरी दिलचस्पी आज भी बनी रहती है, ख़ासकर उनके कानूनी पहलुओं में।
किसी इंसान की जानबूझकर हत्या करने में और अनजाने में अपने हाथों से किसी की जान लेने में फ़र्क होता है। पुराने नियम में जब ख़ुदा ने मूसा को व्यवस्था दी थी, तब उसने भी इन दोनों तरह की हत्याओं के बीच अंतर बताया।
अगर कोई जानबूझकर हत्या करता हैं, तो उसे मौत की सज़ा मिल सकती थी लेकिन अगर किसी की जान अनजाने में चली जाती है, तो उस इंसान को बदला लेनेवालों से हिफ़ाज़त पाने का हक़ था। इसी हिफ़ाज़त के लिए ख़ुदा ने इस्राएलियों को पनाह के शहर बनाने का आदेश दिया। जिस किसी पर हत्या का इल्ज़ाम होता, वह इन पनाह के शहरों में आ सकता था और उसे बदला लेने वालों के हवाले नहीं किया जाता था (यहोशू २०:२–९ HINOVBSI)।
इस्राएल में ऐसे ६ पनाह के शहर थे और वे सभी पहाड़ियों या ऊँचे स्थानों पर बनाए गए थे, ताकि वे दूर से दिखाई दें और आसानी से पाए जा सकें।
जब तक वह आरोपी उस शहर की दीवारों के अंदर रहता, तब तक वह महफ़ूज़ रहता। अगर वह बाहर निकल जाता, तो वह बदला लेने वालों के लिए खुला हो जाता।
यीशु मसीह आपकी पनाह का शहर हैं।
हमारे ग़ुनाहों की मज़दूरी मौत है, लेकिन अगर हम यीशु मसीह में पनाह लेते हैं, तो वह हमे अब्दी ज़िंदगी देता है (रोमियों ६:२३ HINOVBSI)। जब तक हम उसमें बने रहते हैं, न्याय हमें छू नहीं सकता।
*“मैं उन्हें अब्दी ज़िंदगी देता हूँ और वे कभी नाश न होंगे; और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन नहीं सकता।” – यूहन्ना १०:२८ HINOVBSI
सिर्फ़ यीशु मसीह ही नहीं, बल्कि हम भी किसी के लिए पनाह के शहर बन सकते हैं। हम ग़ुनाहों को माफ़ नहीं कर सकते यह हक़ सिर्फ़ यीशु मसीह के पास है लेकिन हम दूसरों के लिए उम्मीद, सहारा और हिफ़ाज़त का स्थान ज़रूर बन सकते हैं। यीशु मसीह ने कहा:
*“तुम जगत की रौशनी हो। जो शहर पहाड़ पर बसा होता है, वह छिप नहीं सकता।” – मत्ती ५:१४ HINOVBSI
क्या आपके आस-पास कोई ऐसा इंसान है जिसे एक पनाह के शहर की ज़रूरत है? यह पैग़ाम उसे ज़रूर पहुँचाना!