क्या आप कभी ऐसे हालात से गुज़रे हो, जहाँ आपको लगा हो कि अब बचना मुश्किल है?
क्या आपने कभी बाइबल पढ़ते समय सोचा है, “यह क्या है? या इसका मतलब क्या है?”
मैंने तो कई बार ऐसा सोचा है, ख़ासकर जब मै कुछ पुराने नियम के हिस्सों को पढ़ती हूँ। लेकिन फ़िर, नए नियम में जब यीशु मसीह का आगमन होता हैं, तो बाइबल अचानक ज़्यादा आसानी से समझ में आने लगती है। यीशु मसीह से हम जुड़ा हुआ महसूस कर सकते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि यीशु मसीह का ज़िक्र पुराने नियम में भी किया गया है? पुराने नियम की कई कहानियाँ, पर्व, रीति-रिवाज़ और घटनाएँ यीशु मसीह की ओर इशारा करती हैं। पौलुस इन्हें “परछाइयाँ” कहता है:
*“ये सब आने वाली बातों की परछाई हैं, पर असली सच्चाई तो मसीह में पाई जाती है।” – कुलुस्सियों २:१७ HINOVBSI
इस पूरे महीने, हर दिन हम पुराने नियम की कई घटनाओं पर ग़ौर करेंगे और देखेंगे कि वह कैसे हमें यीशु मसीह की तरफ़ ले जाती है। मुझे भरोसा है कि इस महीने के आख़िर तक आप अपने उद्धारकर्ता के प्रति पहले से भी ज़्यादा आश्चर्य और आदर से भर जाएँगे।
पुराने नियम में यीशु मसीह की सबसे स्पष्ट झलक, दाऊद में दिखाई देती है। यहाँ तक कि यीशु मसीह को “दाऊद का पुत्र” भी कहा गया है (मत्ती १:१)।
दाऊद की गोलियात पर जीत, क्रूस पर यीशु मसीह की जीत को दर्शाती है।
सौदा यह था कि अगर इस्राएल के फ़ौजीयों ने गोलियात को मार दिया, तो तमाम पलिश्ती लोग इस्राएल के ग़ुलाम बन जाएँगे (१ शमूएल १७:८–९)। लेकिन गोलियात झूठा था, ठीक वैसे ही जैसे शैतान झूठा है (यूहन्ना ८:४४)। हालाँकि दाऊद ने गोलियात को मार दिया, पलिश्ती भाग गए और इस्राएल की सेना को उनका पीछा करके हर एक को मारना पड़ा (१ शमूएल १७:५१–५२)।
ठीक उसी तरह, यीशु मसीह ने दुश्मन (शैतान) को क्रूस पर हरा दिया, फ़िर भी वह अपनी हार को अभी मानता नहीं है और इसलिए हम सबको कभी-कभी आत्मिक लड़ाइयों का सामना करना पड़ता है।
आज आपके लिए चुनौती यह है कि आप जीत की घोषणा करें और अपने “पलिश्ती” का पीछा करें यह जानते हुए कि ख़ुदा के ज़रिए, लड़ाई पहले ही जीती जा चुकी है!