ख़ुदा, तूफ़ान में भी अपनी मौजूदगी ज़ाहिर करता है।
इस हफ़्ते हम यीशु मसीह की ज़िंदगी के २४ घंटों पर गहराई से ग़ौर कर रहे हैं।
ये २४ घंटे काफ़ी तूफ़ान से भरे थे: यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की मौत की ख़बर, चेलों का अपने मिशन से लौटना, यीशु मसीह के ज़रिए पुरें दिन सिख और शिफ़ा देना और पाँच हज़ार लोगों को खिलाना। यह कोई आम दिन नहीं था। 😉
दिन अब ख़त्म होने ही वाला था कि एक ज़बरदस्त तूफ़ान आया।
तूफ़ान डरावने होते हैं, क्योंकि वे अचानक आते हैं और हमारे क़ाबू से बाहर होते हैं। ऐसा लगता है जैसे वे चुन-चुनकर असर डालते हैं। तूफ़ान के बाद हम देखते हैं कि कुछ घर तबाह हो जाते हैं और कुछ बिल्कुल महफूज़ खड़े रहते हैं।
तूफ़ान ज़िंदगी का हिस्सा है। हम सब उनका सामना करते हैं। कभी वे नुक़सान पहुँचाते हैं, तो कभी हिफ़ाज़त की वजह बनते हैं। मैंने एक बार फ़ौजियों की कहानी सुनी थी, जिन्हें रेत के तूफ़ान और उसके बाद हुई तेज़ बारिश की वजह से लड़ाई रोकनी पड़ी। बाद में पता चला कि उसी तूफ़ान ने ज़मीन के अंदर बिछी बारूदी सुरंगों को उजागर कर दिया और उनकी जान बच गई।
पिछले ५ साल मेरे और जेनी के लिए भी तूफ़ान से भरें रहे हैं। हमने कई बार पूछा, “ख़ुदा, तू इस सब में कहाँ हैं?” शायद आपने भी ऐसे ही तूफ़ानों का सामना किया हो: बेरोज़गारी, बीमारी, नुक़सान, बदलाव, उलझन आदि.।
मत्ती १४ में, यीशु मसीह पाँच हज़ार लोगों को खिलाने के बाद चेलों को नाव में आगे भेज देता हैं।
*“नाव किनारे से काफ़ी दूर थी और लहरों से जूझ रही थी क्योंकि हवा उलटी दिशा में चल रही थी।” – मत्ती १४:२४ HINOVBSI
यीशु मसीह जानता था कि यह तूफ़ान आने वाला है। फ़िर भी उसने उन्हें उसमें भेजा।
लेकिन यह कहानी हमें याद दिलाती है कि ख़ुदा हमेशा मौजूद हैं, भले ही हम उसे देख न पाएं। क्योंकि तूफ़ान के बीच भला कौन आता है? यीशु मसीह! वह पानी पर चलते हुए उनकी तरफ़ आता है 😮 (मत्ती १४:२५-२७)।
यीशु मसीह आता है, तूफ़ान को थमा देता है और तूफ़ान के बीच यह साबित करता है कि वही ख़ुदा है।
कभी-कभी ख़ुदा हमें तूफ़ान में जाने देता है, ताकि वह उसी के बीच में अपनी मौजूदगी ज़ाहिर कर सके।