भीड़ को ख़िलाने वाला ख़ुदा, आपकी ज़रूरतों से वाक़िफ़ है!
आज, जैसे हम यीशु मसीह की ज़िंदगी के २४ घंटों पर गहराई से ग़ौर कर रहे हैं, हम उस लड़के की टिफ़िन पर भी नज़र डालेंगे जिसके पास पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ थीं।
हम सबके अपने-अपने मंसूबे होतें हैं, लेकिन याकूब ४:१३-१४ हमें यह याद दिलाता है:
*“अब सुनो, तुम जो कहते हो, ‘आज या कल हम इस या उस नगर में जाएँगे, वहाँ एक बरस ठहरेंगे, व्यापार करेंगे और धन कमाएँगे।’ जबकि तुम यह भी नहीं जानते कि कल क्या होगा। तुम्हारी ज़िंदगी चीज़ ही क्या है? भाप के समान है जो अभी नज़र आए और अभी ग़ायब हो गए।” – याकूब ४:१३-१४ HINOVBSI
इसका मतलब यह नहीं कि हमें योजनाए बनानी नहीं चाहिए, बल्कि यह कि हमें अपने मंसूबों को ढीले हाथों से पकड़ना चाहिए और ख़ुदा के मंसूबों के लिए खुले दिल रहना चाहिए।
उस लड़के के भी शायद अपने इरादे रहे होंगे, लेकिन उसने भरोसा करने और मौजूद रहने का चुनाव किया। उसने यीशु मसीह में कुछ पहचाना। उसने हिसाब-क़िताब करने से ज़्यादा, ईमान को चुना। उसने ख़ुद को ख़ुदा के इरादों से पीछे नहीं हटाया। अक़सर हम यह मानकर, कि क्या मुमक़िन है और क्या नहीं, ख़ुदा के काम को अपनी ज़िंदगी में सीमित कर देते हैं।
यीशु मसीह पर ईमान, एक भरोसे का क़दम है। हम सबके पास अपना-अपना एक छोटा टिफ़िन होता है और यीशु मसीह हमसे पूँछ रहा है कि क्या हम उस टिफ़िन को उसके हवालें करने के लिए राज़ी है? जब हम उसके हवालें कर देते हैं, तो वह उसे हमारी सोच से भी कई ज़्यादा बढ़ा देता है।
जब यीशु मसीह ने रोटियों और मछलियों का चमत्कार किया, तो आख़िर में बारह बड़ी टोकरियाँ बची हुई थीं!
यह भरपूरी का पल मुझे इस आयत की याद दिलाती है:
*“ख़ुदा, हमारी मांगों और ख़्यालों से कई ज़्यादा बढ़कर काम कर सकता है, अपनी उस ताक़त के मुताबिक़ जो हमारे भीतर कार्य कर रही है…” – इफिसियों ३:२०-२१ HINOVBSI
भीड़ को ख़िलाने वाला ख़ुदा, आपकी ज़रूरतों से वाक़िफ़ है! आज जो भी आपके पास है, उसे उसके हवाले करें और उस पर यक़ीन रखें।
ऐ आसमानी पिता, मुझे तेरी ताक़त पर भरोसा करना सिखा, न कि ख़ुद की समझ पर निर्भर रहना। मुझे वह ईमान रखने में मदद कर कि मैं आगे बढ़कर जो कुछ मेरे पास है उसे बाँट सकूँ, यह जानते हुए कि तू उसे बढ़ाएँगा। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।