अपनी सारी फिक्रें यीशु मसीह के पास लेकर आओ।
क्या आप जानते हैं कि हम हर दिन लगभग ३५,००० फ़ैसले लेते हैं जिनमें से २२७ सिर्फ़ खाने के बारे में होते हैं? ज़्यादातर चुनाव छोटे होते हैं और अनजाने में किए जाते हैं, जैसे क्या पहनना है या कितनी रफ़्तार से चलना है। लेकिन हर दिन हमें कई सोच-समझकर किए जाने वाले फ़ैसले भी लेने पड़ते हैं, जैसे यीशु मसीह ने भी लिए।
इस हफ़्ते हम यीशु मसीह की ज़िंदगी के २४ घंटों पर गहराई से ग़ौर कर रहे हैं और उन कुछ फ़ैसलों को समझ रहे हैं जो उसने और उसके आसपास के लोगों ने लिए।
यूहन्ना ६ और मत्ती १४ में हम पढ़ते हैं कि यीशु मसीह एक बड़ी भीड़ को सिखा रहा था और शाम होने लगी थी। उसके चेले फ़िक्र करने लगे कि इतने लोगों को भोजन कैसे मिलेगा। हालाँकि वे सभी अभी-अभी सेवा की सफ़र से लौटे थे, जहाँ उन्होंने अब तक कई चमत्कार देखे थे (मरकुस ६:१२-१३, ३०), फ़िर भी उन्होंने कमी पर ही ग़ौर किया और उस मुश्किल बात को यीशु मसीह के पास ले आए।
तभी एक छोटा लड़का, पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ लेकर आया। उस छोटे लड़के के सामने भी एक चुनाव था: अपना खाना अपने पास रखे या भूखी भीड़ के साथ बाँटे। मुझे यह मानना मुश्किल लगता है कि ५,००० लोगों की भीड़ में सिर्फ उसी छोटे लड़के के पास खाना था। फ़र्क बस इतना था कि वह लड़का अपने पास जो थोड़ा था, उसे पकड़े रहने के बजाय ख़ुदा के हाथों में देने को राज़ी था।
यीशु मसीह के सामने भी एक चुनाव था: लोगों को घर भेज दें या उन्हें खिलाएँ। उसने उस पल अपने आसमानी पिता की ओर अपनी नज़रे उठाई जो ज़रूरतें पूरी कर सकता था।
क्या आप किसी मुसीबत का मुक़ाबला कर रहे हैं? आज आप ये बेहतरीन फ़ैसले ले सकते हैं:
- चेलों की तरह कमी पर ग़ौर करने के बजाय, ख़ुदा की भलाई और उन सभी इंतज़ामों को याद करें जिनसे उसने हमेशा आपकी ज़रूरतें पूरी की हैं।
- अभी भी परेशान हैं? चेलों की तरह अपनी सारी फ़िक्रों को यीशु मसीह के पास ले आए।
- उस छोटे लड़के की तरह, जो आपके पास है उस पर ग़ौर करें चाहे वह छोटा और ग़ैर-ज़रूरी क्यों न लगे और उसे ख़ुदा के हाथों में सौंप दे।
- यीशु मसीह की तरह, चमत्कार देखने से पहले, अपने आसमानी पिता को उसके इंतज़ाम के लिए शुक्र अदा करें।