पूरे दिल से सेवा करने के लिए, ख़ुद को ख़ुदा की मोहब्बत से भरें।
हम पिछले दो दिनों से यीशु मसीह की ज़िंदगी के २४ घंटों पर गहराई से ग़ौर कर रहे हैं।
आज इस पर ग़ौर करतें है, कि हम कैसे पुरे दिल से दूसरों की सेवा कर सकते हैं, जैसे यीशु मसीह ने उस दिन के दबाव के बावजूद किया था।
यीशु मसीह लोगों को रुकावट नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखता था। उसने उन पर रहम दिखाया, क्योंकि उसने उनकी ज़रूरतों और दर्द को देखा। मरकुस लिखता है:
*“जब यीशु मसीह किनारे पर उतरा और बड़ी भीड़ को देखा, तो उसे उन पर तरस आया, क्योंकि वे ऐसे थे जैसे चरवाहे के बिना भेड़ें।” – मरकुस ६:३४ HINOVBSI
उनके दर्द के जवाब में, “उसने उन्हें बहुत सी बातें सिखानी शुरू कीं।”
यूनानी भाषा में, रहमदिली का मतलब है “किसी के दर्द को गहराई से अपने दिल के अंदर तक महसूस करना।” यीशु मसीह ने जिन लोगों से मुलाक़ात की, उनके दर्द को दिल की गहराई से महसूस किया और उसने मोहब्बत और शिफ़ा के ज़रिए जवाब दिया।
पूरे दिल से सेवा करने के लिए, ख़ुद को ख़ुदा की मोहब्बत से भरें। जब आप सच में ख़ुदा से जुड़ते हैं, तब वह आपको अपनी ताक़त से भर देता है और इस क़ाबिल बनाता है कि आप असरदार होकर दूसरों की सेवा कर सकें।
याद रखें, दबाव तब आता है जब हम अपनी बुलाहट और जुनून के दायरे के बाहर ज़्यादा वक़्त बिताते हैं। यीशु मसीह ने ख़ास बात को ख़ास ही रखा। उसने निडर होकर, लोगों पर और उनके आध्यात्मिक सफ़र पर ख़ास ग़ौर किया। उसका अहम मक़सद, उन्हें बचाना और पुनर्स्थापन करना था और उसने यह सब मोहब्बत करते हुए किया। वही मोहब्बत ख़ुदा की ओर से उस पर बरसती थी और फ़िर वह दूसरों तक पहुँचती थी।
आओ मिलकर दुआ करें:
ऐ आसमानी पिता, मेरे दिल को तेरी मोहब्बत और रहमदिली से भर दें। मुझे लोगों को तेरी मोहब्बत बाँटने के अवसर के रूप में देखने में सहायता कर। मुझे वह ताक़त दे कि मैं सच्चे दिल से सेवा कर सकूँ, जैसे यीशु मसीह ने किया। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।