यीशु मसीह आपसे हमदर्दी रखता है।
मेरे एक दोस्त ने एक दिन बड़े गर्व से मुझसे कहा था, “हमारे चर्च में ७ दिन का सम्मेलन हैं जहाँ हम हर रात दो घंटे दुआ करेंगे और आख़री दिन पर हम २४ घंटे और ७ दिन तक दुआ करेंगे!”
इस पर मैंने उससे पूछा, “क्या एक ही दिन में २४ घंटे और ७ दिन हो सकते हैं?” 🤔 और फ़िर हम दोनों ज़ोर से हँस पड़े। उसके जोश में वह भूल गया था कि हर दिन २४ घंटे होते हैं और हर सप्ताह ७ दिन होते हैं। 😅
लेकिन, इन ७ दिनों के दौरान हम यीशु मसीह की ज़िंदगी के ख़ास २४ घंटे के समय पर मनन करेंगे, लेकिन थोड़े अलग अंदाज़ में।
इन २४ घंटों में कमाल की ऊँचाइयाँ भी हैं और गहरी गिरावट के पल भी शामिल हैं। इन कहानियों का ज़िक्र मत्ती १४, मरकुस ६, लूका ९ और यूहन्ना ६ में किया गया हैं और ये घटनाएँ यह ज़ाहिर करती हैं कि यीशु मसीह, इंसानी जज़्बातों से पूरी तरह वाक़िफ़ था।
यीशु मसीह के दिन की शुरुआत, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की हत्या की दु:खद ख़बर से हुई थी। यह वही यूहन्ना था जिसने यीशु मसीह की सेवकाई के लिए रास्ता तैयार किया था। यीशु मसीह ने क्या महसूस किया होगा यह जान कर कि उसके एक अज़ीज़ रिश्तेदार और दोस्त का बेरहमी से क़तल किया गया था। उसे अपने आसमानी पिता के साथ अकेले वक़्त बिताने, शोक मनाने और ख़ामोश रहने की ज़रूरत थी।
लेकिन इससे पहले कि वह ख़ामोशी में जाएँ, उसके चेले लौट आए, अपने शिफ़ा और शिक्षा के अनुभव को जोश से साझा करने के लिए। मरकुस ६ में लिखा है कि उन्होंने “जो कुछ किया और सिखाया था, सब बताया” (मरकुस ६:३०)।
अपने ग़म के बीच भी, यीशु मसीह ने उन्हें सुना, उनका हौसला बढ़ाया और उनकी ख़ुशी में शामिल भी हुआ। फ़िर एक बड़ी भीड़ सामने आई, जो शिफ़ा और मदद चाहती थी। रहमत से भरकर, उसने बीमारों को चंगा किया। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, उसने ५,००० लोगों को खाना खिलाया जो एक अद्भुत इंतज़ाम का चमत्कार था (मरकुस ६:३०-४४)।
आख़िरकार, उसने चेलों को विदा किया और ख़ुद दुआ करने के लिए ख़ामोशी में चला गया।
इब्रानियों ४:१५ हमें याद दिलाता है:
*“क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं जो हमारी कमज़ोरियों में हमदर्दी न कर सके, बल्कि वह हर बात में हमारी तरह आज़माया गया, तौभी उसने पाप नहीं किया।” – इब्रानियों ४:१५ HINOVBSI
यीशु मसीह ने लालच, ग़ुस्सा, धोखा, रहमदिली, अकेलापन, ख़तरा, शोक, दर्द, ख़ुशी और लोगों की लगातार मांगों को महसूस किया और उसका दिन तो बस अभी शुरू ही हुआ था।
आज आप चाहे जिस हालात से गुज़र रहे हों, आप भरोसा रख सकते हैं कि यीशु मसीह अच्छे से जानता हैं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं। वह आपसे हमदर्दी रखता है।
यक़ीन रखें कि यीशु मसीह क़दम-दर-क़दम आपके साथ हैं और आप इस सच में सुक़ून पा सकते हैं। वही आपको समझता है क्योंकि वह ख़ुद भी इन सब से गुज़र चुका है।