मोहब्बत… सच्ची होती है।
१० साल की विवाहित ज़िंदगी में, कॅमरॉन और मैंने एक बात सीखी है और वह यह है कि, एक दूसरे से सच बोलना बेहद ज़रूरी है लेकिन मोहब्बत के ज़रिये।
सच्चाई, ग़ुस्सा होकर या ऊँची आवाज़ में बोलकर चोट पहुँचती है।
*“मोहब्बत बुराई में ख़ुश नहीं होती बल्कि सच्चाई के साथ ख़ुश होती है।” — १ कुरिन्थियों १३:६ HINOVBSI
मोहब्बत और सच्चाई अटूट हमसफ़र हैं।
सच्ची मोहब्बत ग़ुनाह पर पर्दा नहीं डालती, दूसरों की चुगली नहीं करती और नाक़ामयाबी का जश्न नहीं मनाती। बल्कि, मोहब्बत ईमानदारी, इंसाफ़ और संपूर्णता की तलाश करती है। मोहब्बत जो सच्चाई से ख़ुश होती है, वह किसी को चालाकी से प्रभावित करने की कोशिश नहीं करती; वह हिम्मत और रहमदिली दोनों के साथ अँधेरे में रोशनी फ़ैलाती है।
यीशु मसीह ने इस संतुलन को पूरी तरह से पेश किया। जैसा कि बाइबल कहती है, वह *“रहमत और सच्चाई से पूर्ण था” (यूहन्ना १:१४)। उसकी मोहब्बत कभी पाप को नज़रअंदाज़ नहीं करती, लेकिन हमेशा पापियों पर रहमत बरसाती है।
मेरी पसंदीदा बाइबल कहानियों में से एक वह स्त्री है जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी। यहाँ यीशु मसीह दिखाता है कि रहमत और सच्चाई से पूर्ण होने का मतलब क्या है।
वह कहता हैं, *“मैं भी तुझे दोषी नहीं ठहराता।” यह रहमत है। लेकिन वह यह भी कहता है, *“जाओ और अपनी ग़ुनाह भरी ज़िंदगी को छोड़ दो”। और यह सच्चाई है। (यूहन्ना ८:११)
जब हम सच्ची मोहब्बत करते हैं, तो हम उसी पवित्र संतुलन को दर्शाते हैं। यह कोमल है, लेकिन ईमानदार; रहमदिल है, लेकिन स्पष्ट भी।
तो, आज मेरा आपसे यह सवाल है: क्या आप सच्चाई को उतनी ही अहमियत देते हैं जितनी शांति को देते हैं? आपको किस हिस्से में हिम्मत की ज़रूरत हैं जहाँ आप ऐसी मोहब्बत ज़ाहिर कर सकते है ताकि आपके ज़रिये कोई और बेहतर बने और आपके रिश्ते में ज़्यादा ईमानदारी और रहमत लाए?
आओ मिलकर दुआ करें:ऐ आसमानी पिता, मुझे ईमानदारी और रहमदिली के साथ मोहब्बत करना सिखा। मुझे चुगली, दिखावा और डर से बचा। मेरे लफ्ज़ और काम तेरी ईमानदारी की झलक दिखाएँ। मुझे जो सही है उसमें ख़ुश होना सिखा और मुझे सच्चाई की ख़ूबसूरत रोशनी में क़दम बढ़ाने की राह दिखा। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।