मोहब्बत सब्र-पसंद है।
अगर कोई एक चीज़ है जिसकी मुझे शायद और ज़रूरत है, तो वह है सब्र। आप कॅमरॉन से पूछ सकते हैं। 🤪
मुझे चीज़ें जल्दी और सही समय पर करना पसंद है। मुझे इंतज़ार करना या वक़्त ज़ाया करना नापसंद है और जब लोग मेरे हिसाब से सोचते या काम नहीं करते, तो मैं नाराज़ या चिढ़ा हुआ महसूस कर सकती हूँ। मुझे बताओ, क्या मैं अकेली ही ऐसी हूँ? 😅
शायद मुझे अपनी ज़िंदगी में सब्र के साथ साथ, मोहब्बत की बढ़ोतरी पर भी ग़ौर करना चाहिए क्योंकि पौलुस के अनुसार:
*“मोहब्बत सब्र-पसंद हैं, मोहब्बत रहमदिल है।” — १ कुरिन्थियों १३:४ HINOVBSI
मोहब्बत की मौजूदगी, महज़ जज़्बातों या एहसासों से नहीं, बल्कि हमारे हर दिन के बर्ताव और चाल-ढाल से साबित होती है। सब्र और रहमदिली, मोहब्बत के पहले फ़ल हैं। इनके लिए आत्मा की ताक़त और दिल की नर्मी की ज़रूरत होती है। असली सब्र-पसंदी का मतलब महज़ देरी और असुविधाओं को सहन या नज़रअंदाज़ करना नहीं है बल्कि हक़ीक़त में, अनुग्रह दिखते हुए लोगों को सहन करना है।
रहमदिली, मोहब्बत की चलती हुई उदारता है। यह ऊपर उठाती है, शिफ़ा देती है और ताज़गी देती है।
यीशु मसीह ने इन दोनों बातों की मुक़म्मल मिसाल पेश की है। उसने पतरस की बढ़ोतरी होने के लिए सब्र के साथ इंतज़ार किया, अपने इल्ज़ाम लगाने वालों को माफ़ किया और जिन-जिन से रूबरू हुआ, सब पर मेहरबानी ज़ाहिर की। उसकी मोहब्बत न कभी जल्दबाज़ थी, न सख़्त और न ही खुदगर्ज़।
हमारी दुनिया तेज़ी और फ़ौरन प्रतिक्रिया को इनाम देती है, लेकिन मोहब्बत हमसे कहती है कि ठहर जाओ, सुनो, समझो और भलाई को उस वक़्त भी आगे बढ़ाओ जब सामने वाला उसके लायक़ न हो। हर वह लम्हा जो आपके सब्र का इम्तेहान लेता है, दरअसल वही लम्हा है जब आप यीशु की तरह बन सकते हैं और मोहब्बत से जवाब दे सकते हैं।
मेरा आपसे यह सवाल है कि आज आपकी ज़िंदगी में कौन ऐसा है, जिसे आपको सब्र और रहमदिली दिखाने की ज़रूरत है?
ऐ आसमानी पिता, शुक्रिया कि तूने मेरे प्रति सब्र और रहमदिली दिखाई है। मेरी मदद कर कि मैं लोगों को तेरी नज़रों से देख सकूँ। आज मैं सिर्फ़ ग़ुस्से से या असुविधा से जवाब न दूँ, बल्कि तेरे मोहब्बत और रहमदिली से। मेरी मोहब्बत आज हर उस इंसान के लिए एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा बने जिससे मैं रूबरू होता हूँ। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।