मोहब्बत… एक चुनाव है।
मैं हाल ही में एक शादी में गई थी, जहाँ पासबान ने १ कुरिन्थियों १३ से सबको प्रोत्साहित किया। यह मुद्दा बिल्कुल सही था, क्योंकि सब कुछ मोहब्बत के बारे में ही था और वह खुशहाल जोड़ी सच में एक-दूसरे से बेहद मोहब्बत करती थी।
इस हफ्ते, मैं बाइबल के इस मशहूर आयत के हिस्से पर ग़ौर करना चाहती हूँ। लेकिन ऐसा करने के लिए, हमें पिछले अध्याय की आख़री आयत से शुरू करना चाहिए:
*“अब तुम सच्चे दिल से, बड़े वरदानों की आरज़ू करो और फ़िर, मैं तुम्हें सबसे बेहतरीन रास्ता दिखाऊँगा।”— १ कुरिन्थियों १२:३१ HINOVBSI
पौलुस ने यह उन विश्वासियों के लिए लिखा था जो रूहानी वरदानों, क़ामयाबियों और शोहरत के पीछे भाग रहे थे। लेकिन उसने मोहब्बत को सबसे बेहतरीन रास्ता बताया। वह उन बाकी चीज़ों को ख़ारिज नहीं कर रहा था, बल्कि यह दिखा रहा था कि बिना मोहब्बत के, वरदान अपना मक़सद और ताक़त खो देता हैं।
मोहब्बत वह फ़ज़ा है जहाँ ईमान मज़बूत होता हैं और जहाँ सच ख़ूबसूरत बन जाता है।
इसे “बेहतरीन रास्ता” कहकर, पौलुस यह बात साफ़ करता हैं कि मोहब्बत एक चुनाव है, एक राह है जिस पर हम चल सकते हैं और वही सबसे ख़ूबसूरत रास्ता है।
मोहब्बत सिर्फ़ नेकी या एक सिद्धांत या जज़्बात नहीं है, यह ज़िंदगी जीने का एक तरीक़ा है। यह तय करता है कि हम कैसे बोलते हैं, कैसे सेवा करते हैं और दूसरों को किस नज़र से देखते हैं।
मोहब्बत के रवैये को अपनाने का मतलब है , यीशु मसीह के क़दमों पर चलना है, जिसकी रहमदिली हमेशा उसके आराम और सुविधाओं से ज़्यादा अहम थी।
आओ मिलकर दुआ करें:
ऐ आसमानी पिता, मुझे आज तेरा सबसे बेहतरीन रास्ता दिखा। जब मैं हड़बड़ी में हूँ, तो मोहब्बत मुझे धीरजवान बनाए। जब मैं ग़लत हूँ, तो मोहब्बत मुझे रहमदिल बनाए। जब मैं थकी हुई महसूस करूँ, तो मोहब्बत मुझे आराम दे। मुझे तेरी राह पर चलना सिखा, एक क़दम, एक लफ्ज़ और एक मोहब्बत का काम एक वक़्त में करना सिखा। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।