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Publication date 9 मई 2026

उसने महज़ एक ही लफ्ज़ में जवाब दिया: “शुक्रगुज़ारी।”

Publication date 9 मई 2026

इस हफ़्ते के चमत्कार के प्रोस्ताहन मेरी ज़िंदगी की गहराइयों से जुड़े हैं। मदर्स डे एक ऐसा दिन है जो हर साल मेरे लिए बेहद दर्दनाक यादें लेकर आता है और ज़ैक के गुज़र जाने के बाद, यह त्यौहार तो और भी ज़्यादा असहज महसूस होता है। इस मुद्दे पर मैं कुछ व्यक्तिगत बातें साझा कर रही हूँ जो मुझे ऐसे मुश्किल दिनों से गुज़रने में मदद करते हैं।

ज़ैक के दर्दनाक सफ़र के दौरान एक जज़्बात जो मेरे साथ बना रहा, वह था ग़ुस्सा। मेरे दिल में ख़ुदा के प्रति नाराज़गी थी, क्योंकि वह हमारे बेटे को बीमारी से बचा नहीं पाया। और हमारी लाख दुआओं के बावजूद उसने उसे शिफा नहीं दी। मैं उन डॉक्टरों पर भी ग़ुस्सा थी जिन्होंने लक्षणों को पहचानने में चूक की और हालात बिगड़ने दिए। मैं ख़ुद से भी नाराज़ थी कि मैं अपने बच्चे की हिफ़ाज़त नहीं कर पाई। यहाँ तक कि मुझे ज़ैक के शरीर को देखकर भी ग़ुस्सा आता था कि वह उस वायरस से लड़ क्यों नहीं पाया जिसने उसका इतना नुक़सान किया। 

हक़ीक़त में, होने को कोई टाल नहीं सकता था। मेरा ग़ुस्सा किसी भी तरह से जायज़ नहीं था, लेकिन यही तो बात है, है न? ग़ुस्सा कभी भी जायज़ नहीं होता है।

मैं जानती थी कि मुझे इस ग़ुस्से के जज़्बात को लेकर गुज़रना होगा और आख़िरकार उसे छोड़ना भी होगा। यह एक लंबी और मुश्किल प्रक्रिया थी और इसमें मुझे एक प्रोफ़ेशनल काउंसलर की मदद लेनी पड़ी। शायद किसी दिन मैं आपके साथ उस सफ़र के बारे में और साझा करूँगी।

लेकिन एक वक़्त ऐसा आया जब मैं अपने जज़्बात को छोड़ने के लिए तैयार थी। मैंने अपने ग़ुस्से पर पश्चाताप किया और मुझे याद है कि उसके बाद मैं कितना हलका महसूस कर रही थी।

ग़ुस्सा कभी-कभी एक मज़बूत सहारा बन जाता है, या फिर आगे बढ़ने की ताक़त। लेकिन जब मैंने उसे ख़ुदा के हवाले कर दिया, तो मुझे समझ ही नहीं आया कि अब अपने आप के साथ क्या करूँ। वह मेरे अस्तित्व का इतना बड़ा हिस्सा जो बन चुका था।

कुछ दिन बाद मैंने ख़ुदा से कहा, “ठीक है, मैंने अपना ग़ुस्सा छोड़ दिया, लेकिन अब उसकी जगह क्या आएगा?” उन्होंने बस एक सादा-सा जवाब दिया: “शुक्रगुज़ारी।

यह इतना सरल था कि मैं ख़ुद भी ऐसा सोच सकती थी। ख़ुदा ने मुझे याद दिलाया कि शुक्रगुज़ारी में कितनी ताक़त और अहमियत है।

और सिर्फ़ मेरी यह बात ही नहीं, बाइबल भी यही कहती है:

*“हर हालात में शुक्रगुज़ार रहे; क्योंकि यही यीशु मसीह में तुम्हारे लिए ख़ुदा की मर्ज़ी है।”१ थिस्सलुनीकियों ५:१८ HINOVBSI

अपने दर्द में उलझे रहने के बजाय, मैंने उन तमाम चीज़ों की सूची बनानी शुरू की जिनके लिए मैं शुक्रगुज़ार थी। जैसे-जैसे मैं ऐसा करती गई, मैंने महसूस किया कि ख़ुदा की शांति मेरे अंदर उस ख़ालीपन को भर रही है जो मेरे ग़ुस्से के जाने से रह गया था।

आज कुछ वक़्त निकालकर और उन सभी चीज़ों की सूची बनाइए जिनके लिए आप ख़ुदा के शुक्रगुज़ार हैं।

आप एक चमत्कार हैं।

Jenny Mendes
Author

Purpose-driven voice, creator and storyteller with a passion for discipleship and a deep love for Jesus and India.