सबसे ज़्यादा, अपने दिल की हिफ़ाज़त करें।
कुछ दिन पहले मैं अपनी एक दोस्त से बात कर रही थी। उसने खुलकर बताया कि वह अपनी एक दोस्ती के रिश्ते में कितनी गहराई से जूझ रही है। उसने एक ज़रूरतमंद सहेली को अपने घर में रहने की जगह दी थी, लेकिन बाद में उसे महसूस हुआ कि वह इंसान ख़ुदा के प्रति बहुत शक़्क़ी और नकारात्मक सोच रखती है। मेरी दोस्त ने पूरी क़ोशिश की, कि वह अपनी ज़िंदगी और व्यवहार के ज़रिए उसके सामने ख़ुदा की मोहब्बत को ज़ाहिर करे, लेकिन उस लगातार नकारात्मक माहौल में मोहब्बत और सब्र को बनाए रखना उसके लिए आसान नहीं था। वह उसे भीतर ही भीतर थका रहा था और तोड़ रहा था।
जब वह अपनी हालत बयान कर रही थी, तो मुझे सुलैमान राजा के नीतिवचन आध्याय ४ की ये बातें याद आई:
*”मेरे बेटे, मेरी बातों पर ग़ौर कर;मेरी कही हुई बातों की ओर अपना कान लगा।उन्हें अपनी आँखों से ओझल न होने दे,उन्हें अपने दिल में संभाल कर रख;क्योंकि वे उन्हें पाने वालों के लिए ज़िंदगी हैंऔर उनके पुरें शरीर के लिए सेहत।सब से ज़्यादा अपने दिल की हिफ़ाज़त कर,क्योंकि ज़िंदगी का स्रोत उसी में है।”— नीतिवचन ४:२०–२३ HINOVBSI
मैंने अपनी सहेली से पूछा कि उसे उस वक़्त, अपने दिल की हिफ़ाज़त करने के लिए क्या चाहिए?
वह थोड़ी देर चुप रही, फ़िर बोली, “मैं चाहती हूँ कि मेरी सहेली मेरे घर से चली जाए। लेकिन मैं इस बात से भी जूझ रही हूँ कि एक मसीही होने के नाते, मुझे किस हद तक़ फ़ज़ल, मेहमाननवाज़ी और सब्र दिखाना चाहिए?”
मैंने उसे समझाया कि हमे एक अच्छा और ख़ुदा से मोहब्बत करनेवाला दोस्त होना ज़रूरी है और कई दफ़ा ख़ुदा कहता हैं कि दूसरों की सेवा में हमे अपनी आरामदायक ज़िंदगी क़ुर्बान करनी चाहिए। लेकिन कभी भी अपने दिल की हिफ़ाज़त को दांव पर लगाकर नहीं।
सुलैमान हमें याद दिलाता है कि अपने दिल की हिफ़ाज़त करना ख़ुदग़र्ज़ी नहीं, बल्कि अक़्लमंदी है। क्योंकि दिल से ही ज़िंदगी और पूरे शरीर की सेहत बहती है।
यह बात सिर्फ़ दोस्ती पर ही लागू नहीं होती, बल्कि त्योहारों और ख़ास मौकों पर भी होती है। इस रविवार, मदर्स डे है और शायद मैं चर्च नहीं जाऊँगी। एक ऐसी माँ होने के नाते, जिसके बच्चे ने उसकी गोद में ही दम तोड़ दिया, मेरा दिल मदर्स डे की घोषणाओं और जश्न को सहन नहीं कर पाएगा। मैं माँओं को सम्मान देने में यक़ीन रखती हूँ, लेकिन उस दिन मेरे दिल को हिफ़ाज़त की ज़रूरत है और मुझे लगता हैं की, घर पर बैठना बिल्कुल ठीक है।
आपके दिल को क्या चाहिए? क्या आपकी ज़िंदगी में ऐसे लोग, चीज़ें या मौक़े हैं, जिनसे आपको अपने दिल की हिफ़ाज़त करनी है? पवित्र आत्मा से दुआ करें कि वह आपको सही रहनुमाई दे।