जिनकी उम्मीदें ख़ुदा पर टिकी रहती हैं, वे उक़ाब की तरह ऊँची उड़ान भरेंगे।
जब भी मैं हवाई जहाज़ में सफ़र करता हूँ, उड़ान भरते वक़्त और लँडिंग के दौरान मुझे काफ़ी घबराहट होती है। लेकिन जैसे ही हवाई जहाज़ हवा में स्थिर हो जाता है, तो ३६,००० फ़ुट की ऊँचाई पर उड़ते हुए, खिड़की से नीचे ज़मीन को देखना मुझे बेहद भाता है। हालाँकि हवाई जहाज़ ५०० मील प्रति घंटें से भी ज़्यादा रफ़्तार से उड़ रहा होता है, फ़िर भी ऐसा महसूस होता है जैसे नरम-सी सरकन के साथ बस आगे की ओर फ़िसलता जा रहा है।
बे-शक़, अगर इतनी ऊँचाई पर कोई जहाज़ से बाहर निकल जाए, तो सिर्फ़ हवा का दबाव ही उसकी जान ले लेगा। सच्चाई यह है कि जहाज़ महज़ “फ़िसल” नहीं रहा होता बल्कि उसके विशाल इंजन लगातार काम कर रहे होते हैं, ताकि इतनी बड़ी मशीन हवा में बनी रह सके। एक जहाज़ को उड़ान में बनाए रखने के लिए बेहद ज़बरदस्त ताक़त और बहुत ज़्यादा पेट्रोल की ज़रूरत होती है।
लेकिन हवाई जहाज़ के अंदर बैठकर ऐसा लगता है जैसे आप पूरी तरह आरामदेह जगह पर हैं, आप फ़िल्म देख रहे हैं, खाना खा रहे हैं और लगभग इस बात से बे-ख़बर हैं कि गुरुत्वाकर्षण के ख़िलाफ़ कितनी ज़बरदस्त ताक़त काम कर रही है। आप बिना कोई मेहनत किए, बिजली की रफ़्तार से सफ़र कर रहे होते हैं।
यह सब मुझे बाइबल की इस आयत की याद दिलाता है:
*“जो लोग ख़ुदा पर उम्मीद रखते हैं, वे नई ताक़त हासिल करेंगे; वे उक़ाबों की तरह पंखों पर उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और थकेंगे नहीं, वे चलेंगे और कमज़ोर नहीं होंगे।” — यशायाह ४०:३१ HINOVBSI
कभी-कभी ज़िंदगी एक लंबी और थकाने वाली सफ़र जैसी लग सकती है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि हमारी ज़िंदगी को संभालने का काम ख़ुदा की अज़ीम ताक़त कर रही है। जिस तरह हवाई जहाज़ के इंजन ज़बरदस्त ताक़त से काम करते हैं ताकि वह उड़ता रहे, उसी तरह ख़ुदा भी हमारी ज़िंदगी में अद्भुत सामर्थ के साथ काम करता है, ताकि हम उक़ाबों की तरह ऊँचा उड़ सकें।
ख़ुदा की मर्ज़ी यह नहीं है कि आप ज़िंदगी में संघर्ष करते हुए ख़ुद को थका दें और कमज़ोर महसूस करें, बल्कि यह है कि आप उसकी मौजूदगी में सुक़ून से विश्राम करें और उसे आपको “उड़ाने के लिए मदद” दें।
*”यही इस्राएल के पवित्र, सर्वशक्तिमान ख़ुदा का वचन है:“पश्चाताप और विश्राम में तुम्हारा उद्धार है, ख़ामोश रहने और भरोसे में तुम्हारी ताक़त है।” — यशायाह ३०:१५ HINOVBSI