• HI
    • AR Arabic
    • CS Czech
    • DE German
    • EN English
    • ES Spanish
    • FA Farsi
    • FR French
    • HI Hindi
    • HI English (India)
    • HU Hungarian
    • HY Armenian
    • ID Bahasa
    • IT Italian
    • JA Japanese
    • KO Korean
    • MG Malagasy
    • MM Burmese
    • NL Dutch
    • NL Flemish
    • NO Norwegian
    • PT Portuguese
    • RO Romanian
    • RU Russian
    • SV Swedish
    • TA Tamil
    • TH Thai
    • TL Tagalog
    • TL Taglish
    • TR Turkish
    • UK Ukrainian
    • UR Urdu
Publication date 30 अप्रै. 2026

हर रुकावट और ग़ुनाह को दूर करें जिसमें हम आसानी से उलझ सकते हैं।

Publication date 30 अप्रै. 2026

जब हम सेवाकाई के लिए जाते हैं, तो हमेशा हमें काफ़ी सारा और वज़नदार सामान साथ लेकर सफ़र करना पड़ता है। हम जानते हैं कि हवाई अड्डे पर इतना ज़्यादा सामान चेक-इन करना परेशानी पैदा करता है। इसी वजह से हमने यह सीख लिया है कि समय पर पहुँचना कितना ज़रूरी है, अतिरिक्त बैगेज अलाउंस बुक करना कितना अहम है और यह पक्का करना कि वज़न हद से ज़्यादा न हो।

लेकिन हम अक़सर कम अनुभव वाले मुसाफ़िरों को अपने सामान से जूझते हुए देखते हैं, एयरलाइन स्टाफ़ से गुज़ारिश करते हुए कि उनका ज़्यादा वज़न वाला सामान चेक-इन कर लिया जाए, या एयरपोर्ट पर घबराहट में सूटकेस दोबारा पैक करते हुए, जहाँ उनका पूरा सामान सबके सामने फ़ैल जाता है।

अगर आपने कभी सफ़र किया है, तो आप जानते हैं कि हद से ज़्यादा सामान अपने साथ ना लेना, यह सच हैं और यह बिल्कुल सही भी है। एक हवाई जहाज़ सिर्फ़ एक हद तक ही वज़न उठा सकता है। ज़रा सोचिए, अगर कोई पाबंदी न हो, तो लोग इतना ज़्यादा सामान ले आएँगे कि हवाई जहाज़ उड़ ही न पाए। 🤭

आत्मिक रूप से भी यही उसूल लागू होता है। ज़िंदगी में न-माफ़ी, डर या घमंड के वज़न से एक ऐसा भारी बोझ बन जाता है, जो हमें ऊपर उठने या बढ़ने नहीं देता।

लेकिन रूहानी तौर पर, जब हम अपनी ज़िंदगी का भारी वज़न और बोझ क्रूस के पास छोड़ देते हैं, तो सच में हम ख़ुदा के साथ मुफ़्त में उड़ान ले सकते हैं। 

*”इसलिए, जब हम इतने बड़े गवाहों के बादल से घिरे हुए हैं, तो आइए हर रुकावट और ग़ुनाह को दूर करें जिसमें हम आसानी से उलझ सकते है। और उस दौड़ को सब्र के साथ दौड़ें जो हमारे लिए ठहराई गई है।”इब्रानियों १२:१ HINOVBSI

क्या आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कोई आत्मिक बोझ उठा रहे हैं, या आपने उस बोझ को हल्का करने का फ़ैसला किया है? यीशु मसीह से पूछें और अपनी सारी फ़िक्रें उस पर डाल दें, यह जानते हुए कि वह आपकी परवाह करता है। (भजन संहिता ५५:२२)

ऐ आसमानी पिता, आज हमें वह समझ दे कि हम अपना सारा बोझ तेरे हवाले कर सकें। ख़ुदा, हमें तुझपर यक़ीन करना और बिन-बोझ और दबाव की ज़िंदगी जीना सीखा। इसलिए आज हम सारी अनचाही बातों को उतार फेंकते हैं और तुझसे दुआ करते हैं कि तू हमें रहमत, उम्मीद और मोहब्बत के साथ उड़ान लेने की आज़ादी दें। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

आप एक चमत्कार हैं।

Cameron Mendes
Author

Worship artist, singer-songwriter, dreamer and passionate about spreading the Gospel.